भक्तामर की साधना से आत्म-कल्याण संभवःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवशरण में धर्मसभा आयोजित हुई। पूज्य डॉ. सुरेन्द्र मुनि जी म.सा. ने भक्तामर स्तोत्र के तीसरे श्लोक की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए कहा कि भक्तामर की साधना एवं प्रभु की स्तुति आत्मा को निर्मल बनाने का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आचार्य मानतुंग ने अपनी विनयशीलता प्रकट करते हुए स्वयं की तुलना उस बालक से की, जो जल में दिखाई देने वाले चंद्रमा के प्रतिबिंब को पकड़ने का प्रयास करता है। चंद्रमा हाथ नहीं आता, लेकिन पानी का स्पर्श अवश्य हो जाता है। उसी प्रकार प्रभु…
