मेवाड़ के जौहर पर सवाल नहीं, इतिहास को समझने की जरूरत
शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की परंपरा पर टिप्पणी से नाराज मेवाड़ उदयपुर, 6 सितंबर। मेवाड़ की धरती केवल किलों, महलों और स्थापत्य की भूमि नहीं है। यह वह भूमि है जहां सत्ता से अधिक स्वाभिमान को महत्व दिया गया, जहां पराजय को स्वीकार करने से पहले अंतिम सांस तक संघर्ष करने की परंपरा रही और जहां इतिहास के सबसे कठिन दौर में भी अस्मिता की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। यही कारण है कि मेवाड़ के जौहर और साके का उल्लेख आज भी केवल इतिहास की घटना के रूप में नहीं, बल्कि सामूहिक स्मृति और शौर्य परंपरा के रूप…
