प्रख्यात जीवनशैली विशेषज्ञ अरुण ऋषि स्वर्गीय ने पत्रकारों से किया संवाद
47 वर्षों से बीमार न पड़ने का दावा, 73 की उम्र में भी युवाओं जैसी ऊर्जा का साझा किया राज
उदयपुर, 17 अक्टूबर। प्रख्यात जीवनशैली विशेषज्ञ और उद्योगपति से समाजसेवी बने अरुण ऋषि स्वर्गीय ने शनिवार को सूचना केंद्र में स्थानीय पत्रकारों से संवाद किया। बातचीत के दौरान बेहतर और स्वस्थ जीवन जीने की कला से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होने कहा कि भारत में रोजाना 10 हजार करोड़ रूपए दवाइयों और इलाज पर खर्च होते हैं। बेहतर जीवन जीने की कला से न केवल यह खर्च घटाया जा सकता है बल्कि बीमारियों से दूर रहते हुए जीवनस्तर में सुधार लाया जा सकता है।
47 सालों से नहीं हुए बीमार
73 वर्षीय अरुण ऋषि स्वर्गीय ने एक बेहद चौंकाने वाला और प्रेरणादायी दावा करते हुए कहा कि वे पिछले 47 वर्षों से एक भी दिन बीमार नहीं पड़े हैं। इस उम्र में भी खुद को पूरी तरह श्युवाश् और ऊर्जावान महसूस करने वाले श्री स्वर्गीय ने बताया कि इसका पूरा श्रेय उनकी सक्रिय दिनचर्या, प्राकृतिक जीवनशैली और कड़े आत्म-अनुशासन को जाता है।
दैनिक आदतों में बदलाव है जरूरी
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के समय में लोगों की निर्भरता सुबह से लेकर रात तक रसायनों और महंगे उत्पादों जैसे टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू और सौंदर्य प्रसाधन पर बहुत ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा, ष्स्वास्थ्य के लिए महंगे संसाधनों या प्रॉडक्ट्स से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति की दैनिक आदतें और अनुशासन हैं। हमें कम खर्च में अपनी रोजमर्रा की आदतों को बेहतर और प्राकृतिक बनाने की जरूरत है।ष्
28 लाख किमी की यात्रा और 2800 से अधिक कार्यशालाएं
मूल रूप से उद्योगपति रहे अरुण ऋषि स्वर्गीय ने वर्ष 1997 में अपने व्यवसाय से निवृत्ति ले ली थी। इसके बाद उन्होंने उज्जैन में श्आयुष्मान भव ट्रस्टश् की स्थापना की। पिछले 29 वर्षों में वे अपने इसी मिशन के तहत पूरे देश में 28 लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर चुके हैं और लोगों को जागरूक करने के लिए 2800 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित कर चुके हैं।
उन्होंने पारंपरिक और कम खर्च वाले तरीकों से दांतों की सफाई और शरीर को स्वस्थ रखने के कुछ व्यावहारिक नुस्खे भी बताए। इस दौरान पीयूष दशोरा, दीपक शर्मा, दिनकर खमेसरा, जसवंत सिंह सहित मीडिया जगत के कई वरिष्ठ पत्रकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
नाम के आगे लगाते हैं स्वर्गीय
अरूण ऋषि ने अपने नाम के साथ स्वर्गीय जोड़ने के पीछे का रोचक रहस्य बताया। उन्होने कहा कि प्राकृतिक आदतें अपनाने से उनका स्वास्थ्य बेहतर हुआ और वे बीमार नहीं पड़ते हैं। पहला सुख नीरोगी काया के मूल मंत्र को देखते हुए उन्हे स्वर्ग जैसी अनुभूति होती है जहां पर कोई रोग और दुख नहीं है। ऐसे में उन्होने स्वर्ग के निवासी होने की अनुभूति के चलते अपने नाम के आगे स्वर्गीय लगाना शुरू कर दिया।
