47वें सामूहिक विवाह में 50 जोड़ों की नई जिंदगी का शुभारंभ
-भगवान प्रसाद गौड़
उदयपुर, 19 सितम्बर। किसी के चेहरे पर बरसों की प्रतीक्षा के बाद मिली मुस्कान थी, किसी की आंखों में आने वाले कल का सपना। पीले परिधानों में सजे 50 जोड़े जब पीले फूलों से सजे मंच पर साथ बैठे तो लगा, जैसे संघर्षों की लंबी राह पीछे छूट गई और जिंदगी ने उम्मीद का पीला रंग ओढ़ लिया। किसी के लिए यह अकेलेपन से उबरकर आगे बढ़ने का दिन था, तो किसी के लिए अभावों के बीच अपने घर-आंगन का सपना सच होने का। सेवा, संवेदना और नए जीवन की उम्मीद से भरे इसी भाव के बीच नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ, लियों का गुड़ा परिसर में शनिवार को दो दिवसीय 47वां नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन युवक-युवतियों का सामूहिक विवाह समारोह श्रद्धा, उल्लास और आत्मीयता के साथ शुरू हुआ।

गणपति वंदन से मंगलारंभ
विवाह समारोह का शुभारंभ प्रातः शुभ मुहूर्त में गणपति स्थापना और गणपति वंदन नृत्य ‘घर में पधारो गजानंद जी’ के साथ हुआ। गणपति की आराधना के बीच विवाह मंडप में मंगल भाव जागा और इसके साथ ही हल्दी तथा मेहंदी की पारंपरिक रस्मों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया।

प्रातः 11:15 बजे सभी 50 जोड़े पीले परिधानों में पीले फूलों से सुसज्जित हाड़ा सभागार के मंच पर अपने निर्धारित स्थानों पर आसीन हुए। संस्थान के संस्थापक-चेयरमैन पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, सहसंस्थापिका कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल एवं निदेशक वंदना अग्रवाल ने विशिष्ट अतिथियों के साथ गणपति स्थापना कर विवाह समारोह का विधिवत शुभारंभ किया।
निदेशक वंदना अग्रवाल के निर्देशन में अतिथियों ने विवाह की पारंपरिक रस्मों में सहभागी बनते हुए जोड़ों को हल्दी लगाई और मेहंदी की रस्म निभाई। विवाह गीतों पर अतिथियों ने उत्साह से नृत्य किया। ढोलक की थाप, गीतों की मधुर धुन और हंसी-खुशी के बीच पूरा परिसर किसी बड़े पारिवारिक उत्सव की तरह जीवंत हो उठा।

सेवा मनीषियों का सम्मान
समारोह में मुख्य अतिथि भारतीय सेना के पूर्व कमांडर बी.एल. बंधन (आगरा) एवं राजेश कंजानी (अर्जेंटीना) सहित सेवा मनीषियों का संस्थान के संस्थापक-चेयरमैन कैलाश ‘मानव’, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल, जगदीश आर्य ने पगड़ी, उपरना एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

महिला संगीत में दिखे भारतीय संस्कृति के रंग
पहले दिन की शाम महिला संगीत एवं नृत्य संध्या के नाम रही। वैवाहिक गीतों की मधुर धुनों के बीच राधा-कृष्ण रास, रुद्रावतार हनुमान, मां दुर्गा के नवस्वरूप तथा अयोध्यापति श्रीराम पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं ने भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को मंच पर साकार किया। रंग-बिरंगे परिधान, संगीत और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने समारोह में चार चांद लगा दिए।
राधा-कृष्ण के प्रेम और माधुर्य से लेकर हनुमान के समर्पण, मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप और श्रीराम के आदर्शों तक की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। विवाह गीतों पर थिरकते कदमों और तालियों की गूंज से देर शाम तक सेवा महातीर्थ उत्सव की खुशियों से सराबोर रहा।
रविवार को सात फेरों के साथ शुरू होगा नया सफर
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि रविवार को प्रातः 11:15 बजे सभी 50 जोड़े वैदिक विधि-विधान के साथ पवित्र अग्नि के सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन में प्रवेश करेंगे। संस्थान की ओर से प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की जाएगी।
हर जोड़े की अपनी संघर्ष और उम्मीद की कहानी
इस सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हर जोड़े की अपनी एक कहानी है। किसी ने शारीरिक चुनौती के बावजूद जीवन से हार नहीं मानी, तो किसी ने आर्थिक कठिनाइयों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा। किसी ने अकेलेपन की लंबी राह तय की तो किसी ने सामाजिक परिस्थितियों के बीच सम्मान और अपनत्व के साथ जीवनसाथी की तलाश पूरी की।
इन जोड़ों के लिए विवाह केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। किसी के लिए यह बरसों से देखे जा रहे घर बसाने के सपने का दिन है, तो किसी के लिए यह भरोसा कि अब जिंदगी की मुश्किल राह पर कोई साथ चलने वाला है।
इन 50 जोड़ों की कहानियां यह भी कहती हैं कि जिंदगी की पहचान उसकी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों के बीच खड़े रहने के साहस से होती है। शारीरिक चुनौती हो या आर्थिक अभाव, अकेलापन हो या सामाजिक कठिनाई – इन सबके बीच इन लोगों ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा।
यही इस आयोजन की सबसे बड़ी मानवीय खूबसूरती है। यहां दो लोग केवल विवाह के बंधन में नहीं बंध रहे, बल्कि एक-दूसरे के संघर्षों को अपना सहारा और सपनों को अपनी जिम्मेदारी बनाने जा रहे हैं। सात फेरों से पहले ही उनके चेहरों की खुशी बता रही थी कि साथ मिल जाए तो जिंदगी की कठिन राहें भी आसान लगने लगती है।
‘वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी’ में देखा सेवा का संसार
समारोह में आए सभी अतिथियों ने नारायण सेवा संस्थान के नवनिर्मित भवन ‘वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी’ का भी विजिट किया। उन्होंने संस्थान के विभिन्न सेवा प्रकल्पों को करीब से देखा तथा उपचाररत रोगियों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। अतिथियों ने संस्थान की ओर से दिव्यांगजन एवं जरूरतमंदों के लिए किए जा रहे सेवा और पुनर्वास कार्यों की जानकारी ली।
