वेदना और संवेदना से जागता है अध्यात्म का द्वारःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि जीवन घटनाओं से रहित नहीं हो सकता, लेकिन उन घटनाओं को देखने और समझने की हमारी दृष्टि ही सुख-दुख का निर्धारण करती है। घटना से अधिक महत्वपूर्ण उसके प्रति हमारे भाव और विचार होते हैं। साध्वी श्रीजी ने कहा कि अपने दोषों के प्रति वेदना और दूसरों के दुख के प्रति संवेदना का भाव होना चाहिए। जिस व्यक्ति के भीतर वेदना और संवेदना दोनों जागृत हो जाएं, उसका अध्यात्म के क्षेत्र में प्रवेश माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में हम…
