राग-द्वेष पर विजय ही सिद्धत्व की राह, कषायों का क्षय ही सच्ची साधना: डॉ. राजेन्द्र मुनि
उदयपुर, 28 जुलाई। देवेन्द्रधाम में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचनमाला के दौरान डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि आत्मा के कर्म बंधन का मूल कारण राग और द्वेष हैं। जब तक मनुष्य इन दोनों विकारों से मुक्त नहीं होता, तब तक सिद्ध पद की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राग-द्वेष से ही क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी चारों कषाय उत्पन्न होती हैं, जो आत्मा को संसार के बंधनों में जकड़े रखती हैं। उन्होंने भगवान महावीर के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने राग-द्वेष और कषायों पर विजय प्राप्त कर केवलज्ञान हासिल किया। यदि हमारी साधना को सार्थक…
