राग-द्वेष पर विजय ही सिद्धत्व की राह, कषायों का क्षय ही सच्ची साधना: डॉ. राजेन्द्र मुनि

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 28 जुलाई। देवेन्द्रधाम में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचनमाला के दौरान डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि आत्मा के कर्म बंधन का मूल कारण राग और द्वेष हैं। जब तक मनुष्य इन दोनों विकारों से मुक्त नहीं होता, तब तक सिद्ध पद की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राग-द्वेष से ही क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी चारों कषाय उत्पन्न होती हैं, जो आत्मा को संसार के बंधनों में जकड़े रखती हैं।
उन्होंने भगवान महावीर के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने राग-द्वेष और कषायों पर विजय प्राप्त कर केवलज्ञान हासिल किया। यदि हमारी साधना को सार्थक और सफल बनाना है तो सबसे पहले अपने भीतर की कषायों का क्षय करना होगा। साधना तभी फलदायी बनती है, जब जीवन में समता, संयम और वैराग्य का भाव विकसित हो।
डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य का रहन-सहन, व्यवहार और विचार भी राग के प्रभाव से प्रभावित हो रहे हैं। प्रत्येक वस्तु के प्रति अत्यधिक मोह और आसक्ति ही संसार के दुखों का कारण है। धर्म हमें समभाव, आत्मसंयम और वैराग्य का संदेश देता है, जिससे जीवन में वास्तविक शांति और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
धर्मसभा में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने  भगवान आदिनाथ की स्तुति स्वरुप सामूहिक बड़ी साधु वंदना का सस्वर पाठ कराया एवं भगवान आदिनाथ के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं, जिन्होंने मानव समाज को धर्म, संयम और सदाचार का मार्ग दिखाया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कल 29 जुलाई को गुरुपूर्णिमा पर्व विशेष गुरु वंदना का कार्यक्रम एवं विधि सुरेंद्र मुनि जी महाराज द्वारा करवाई जाएगी।’ बाहर से आये समाजसेवियों का पूर्व महापौर रजनी डांगी, महामंत्री हिम्मत बडाला ने स्वागत किया और अंत में अध्यक्ष रोशनलाल जैन ने आभार व्यक्त किया।

By Udaipurviews

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