निष्काम भक्ति से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्तःडॉ. राजेन्द्र मुनि
भक्तामर की 48 गाथाओं में समाहित हैं विशिष्ट बीज मंत्र, विनय को बताया धर्म का मूल उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवशरण में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान प्रवचन आयोजित हुआ। डॉ सुरेंद्र मुनि ने भक्तामर स्तोत्र की महत्ता बताते हुए कहा कि सच्ची भक्ति निष्काम भाव से की जानी चाहिए। भक्ति में किसी फल की इच्छा नहीं, बल्कि प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण होना चाहिए। प्रवचन में बताया गया कि आचार्य मानतुंग जी ने भक्तामर स्तोत्र के माध्यम से प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की वंदना की थी। भक्तामर स्तोत्र…
