कहां खो गई है हमारे घरों की शान… नन्हीं चिड़िया ?
विश्व गोरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रकाशनार्थ विशेष आलेख -डॉ. कमलेश शर्मा चीं-चीं कर आती और घर-आंगन में फुदकती... नन्हीं सी चिड़िया...जो कभी घरों की शान थी। कच्चे घरों की खपरैल के बीच, दिवार की दरारों, तस्वीरों के पीछे, गर्डर के कोनों, टीन-टप्परों व छज्जों के नीचे तथा छत पर पानी के नालदों में तिनकों से बनाये हुए इनके घौंसले देखे जाते थे। इनकी चहचहाहट से वीरान घर भी आबाद और जीवंत होते रहते थे। इसी नन्हीं चिड़िया को दाना-पानी देकर देखभाल करते घर के छोटे बच्चों से लेकर बूढ़े हाथ कभी भी थकते नहीं थे। प्राचीन काल से ही…
