भवानी संस्कार शिविर के आयोजन की घोषणा का स्वागत — राजघराने के दशहरा कार्यक्रम में मातृशक्तियों को मिला तलवार रास का आमंत्रण
उदयपुर। प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रिय पत्नी वीरांगना महारानी अजब्दे कुंवर के नाम से स्थापित मातृशक्ति की अजब सेवा संस्थान यूनिवर्सिटी रोड छोटी पीपली उदयपुर में नवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत सनातनी गरबों के साथ शस्त्र पूजन एवं शौर्य तलवार रास कार्यक्रम विधिवत संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं वीरता नारी शक्ति और भारतीय संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर श्री गुरुजी डॉ. प्रदीप कुमावत ने आगामी निःशुल्क शिविर को ‘भवानी संस्कार शिविर’ नाम देने तथा शिविर में भाग लेने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को तलवार वितरित करने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने इस पहल को मातृशक्ति में आत्मविश्वास शौर्य और संस्कारों के जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।भाजपा मीडिया प्रवक्ता एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. सीमा चंपावत ने नारी शक्ति के सम्मान सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए आयोजकों का उत्साहवर्धन किया।
महाराणा प्रताप के द्वितीय पुत्र श्री सहसामल की वंशज बाईसा दिव्या राणावत ने सभी मातृशक्तियों को राजघराने में आयोजित होने वाले दशहरा कार्यक्रम में शामिल होकर शौर्य तलवार रास करने का स्नेहपूर्ण निमंत्रण दिया। इस अवसर पर जमाई कामख्या संभवसिंह एवं बाईसा कुकु राणावत ने शस्त्र पूजन और कन्या पूजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कृति में शक्ति आराधना और नारी सम्मान के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में बबीता जैन राकेश पोरवाल वंदना पोरवाल वार्ड 69 की पार्षद रचना शर्मा एवं साहू समाज अध्यक्ष लालेश मंगरुंडिया सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
उपस्थित अतिथियों ने राजस्थान में आयोजित इस अनूठे ‘अजब गजब तलवार गरबा रास’ की सराहना करते हुए इसे सनातन संस्कृति की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और मातृशक्ति को शौर्य एवं संस्कारों से जोड़ने वाली प्रेरणादायी पहल बताया। उन्होंने संस्थान के प्रयासों को आशीर्वाद देते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और वीरता की परंपराओं को सशक्त बनाने की कामना की।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि नारी केवल संस्कारों की संवाहक ही नहीं बल्कि शक्ति साहस और स्वाभिमान की प्रतीक भी है। शस्त्र पूजन शौर्य तलवार रास और कन्या पूजन के माध्यम से मातृशक्ति के सम्मान तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रेरक संदेश दिया गया।
