परिवर्तनशील शारीरिक धर्मों से ऊपर उठकर आत्मा के शाश्वत धर्म को पहचानना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य: रासेश्वरी देवी जी
उदयपुर. 20 मई. ब्रज गोपिका सेवा मिशन के तत्वावधान में हिरण मगरी सेक्टर-13 स्थित 'आशीष वाटिका' में चल रहे नौ दिवसीय "पंचम वेद श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान रहस्य" महोत्सव के तृतीय दिन व्यासपीठ से पूजनीया रासेश्वरी देवी जी ने शास्त्रों के उस सर्वोच्च और अकाट्य दार्शनिक पक्ष को प्रस्तुत किया, जो व्यक्ति को सांसारिक मोह से निकालकर गोविंद के चरणों में स्थापित करता है। सत्र की शुरुआत व्यासपीठ के पारंपरिक पूजन, मंगल शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन से हुई। व्यासपीठ से 'धर्म' की वैज्ञानिक और तात्विक व्याख्या करते हुए रासेश्वरी देवी जी ने कहा कि संसार में धर्म…
