जैन धर्म में सामाजिक धर्म की सर्वाधिक महत्ता :रत्नसेन सूरी
उदयपुर, 7 नवम्बर। जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरी की निश्रा में महावीर विद्यालय-चित्रकूट नगर में भद्रंकर परिवार द्वारा आयोजित महामंगलकारी उपधान तप की आराधना बडे हर्षोल्लास के साथ चल रही है। आज उपधान तप के आराधकों का चैत्यस्तव की आराधना स्वरूप चोकिये में मंगल प्रवेश हुआ। प्रवचन दरम्यान उपधान तप के तीन आराधकों की आराधना पूर्ण होने पर आयोजक श्री भद्रंकर परिवार की ओर से बहुमान किया गया। धर्मसभा में प्रवचन देते हुए जैनाचार्य श्री ने कहा कि-सामायिक अर्थात् पाप कार्य से विराम पाने की मंगल क्रिया। यह सामायिक अल्प कालीन भी होती है और जीवन भर की भी होती है।…
