डूंगरपुर, 6 अक्टूबर। भारत सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण संबंधी संशोधित प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी कर दिए गए हैं। संशोधित प्रावधानों के तहत जन्म अथवा मृत्यु की घटना की सूचना निर्धारित समयावधि के बाद दिए जाने पर विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
अतिरिक्त एवं मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म – मृत्यु) एवं जिला कलक्टर श्री देशलदान ने बताया कि जन्म अथवा मृत्यु की घटना की सूचना एक वर्ष से अधिक तथा दो वर्ष के भीतर दिए जाने पर पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर किया जाएगा। संबंधित अधिकारी द्वारा जन्म अथवा मृत्यु की घटना की सत्यता का आवश्यक सत्यापन किया जाएगा तथा निर्धारित शुल्क जमा कराना अनिवार्य होगा।
उन्होंने बताया कि इसी प्रकार जन्म अथवा मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद सूचना दिए जाने की स्थिति में पंजीकरण प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिनके क्षेत्राधिकार में जन्म अथवा मृत्यु की घटना हुई है, द्वारा घटना की सत्यता के सत्यापन के पश्चात जारी आदेश के आधार पर ही किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के लिए निर्धारित शुल्क भी देय होगा।
जिला कलक्टर ने आमजन से अपील की है कि जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से करवाएं, ताकि भविष्य में विलंबित पंजीकरण के लिए अपनाई जाने वाली अतिरिक्त प्रक्रिया से बचा जा सके।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव: 1 अक्टूबर 2026 से नए प्रावधान लागू
