हवा मिले तो वाह, न मिले तो आह
सुबह की पहली किरण के साथ जब कोई हल्की हवा चेहरे को छूती है तो मन अनायास खिल उठता है। तपती दोपहर में अचानक आया ठंडा झोंका राहत बन जाता है और शाम की मंद बयार दिनभर की थकान हर लेती है। हम अक्सर इस सुखद अनुभूति को महसूस तो करते हैं, लेकिन शायद ही कभी सोचते हैं कि हवा हमारे जीवन में कितनी गहराई से बसी हुई है। सच तो यह है कि मनुष्य का पूरा अस्तित्व हवा की डोर से बंधा है। हवा मिले तो वाह, न मिले तो आह। हवा केवल गैसों का मिश्रण नहीं है। यह…
