सनानत संस्कार ने ही विश्व में वसुधैव कुटुम्बकम की परीकल्पना – मंत्री बाबुलाल खराड़ी
बायोडायवर्सिटी एंड सस्टेनेबल प्रैक्टिस विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का हुआ आयोजन प्रकृति हमें सब कुछ देने को तैयार है लेकिन लालची बन कर नहीं - प्रो. सारंगदेवोत उदयपुर 25 जून। भारत विश्व गुरू था, यह हमने नहीं कहा - यह दुनिया ने कहा। भारत विश्व के कल्याण की बात करता है जिसमें पृथ्वी रहने वाली सभी प्राणी आ गये। भारत के विश्वगुरुत्व के पीछे भारत की ज्ञान-ऋषि परंपरा, संस्कार, संस्कृति उसका आधार रहा जिसमे वसुधैव कुटुम्बकम , प्राणी-प्रकृति सद्भाव की भावना निहित थी। आज पुनः इन सभी की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। प्रकृति हो या संस्कृति दोनों…
