भगवान बिरसा मुंडा के साथ अंतिम दिन क्या हुआ?
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर विशेष आलेख लेखक: डॉ मन्नालाल रावत-सांसद उदयपुर लोकसभा हमारी धरती पुण्य भूमि है। हमारा देश पावन धरा है। यहां कई दुर्लभ मनीषियों ने जन्म लिया। जिन्होंने इतिहास रचा। मानव कल्याण के लिए कई सूत्र दिए। कइयों ने तो स्वयं को होम किया परंतु एक बड़ो विचार दिया जो सनातन भाव से उत्प्रेरित रहा। ऐसा ही एक भाव 15 नवंबर 1875 को वर्तमान झारखंड की धरती से जागृत हुआ। लोगों ने उसे विचार को श्धरती आबाश् कहा। स्वाधीनता की ओर बढ़ते कालखंड में भारत ने उन्हें भगवान बिरसामुंडा कहा। श्रीमद् भगवद्गीता में भगवान का…
