वैराग्य भाव के बिना प्रभु की प्राप्ति संभव नहींःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
दूध से घी बनने की प्रक्रिया की तरह आत्मिक उन्नति के लिए भी साधना जरूरी उदयपुर। श्री वासुपूज्य महाराज मंदिर ट्रस्ट दादावाड़ी, सूरजपोल के तत्वावधान में चल रहे आध्यात्मिक चातुर्मास में शनिवार को गुरुवर्या बहिन म. सा. डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 के सान्निध्य में प्रथम श्रमणी वृंद ने मंगलपाठ किया। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने जीवन की सफलता के लिए आत्मचिंतन, वैराग्य और आसक्तियों के त्याग का संदेश दिया। साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने कहा कि परमात्मा महावीर ने अपने पूर्वजन्म के कर्मों का क्षय करने में साढ़े बारह वर्ष लगाए और प्रमाद रहित होते…
