भाग्य का निर्माण हाथ की रेखाओं से नहीं पुरूषार्थ से होता:संयमलता
उदयपुर। सेक्टर 4 श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी डॉ श्री संयमलताजी म. सा.,डॉ श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में महासती संयमलता ने कहा कि भाग्य और पुरूषार्थ जीवन के दो पहलू है। इस दुनिया में जो कुछ भी मिलता है और मिलता वहंी है जो उसके भाग्य में लिखा होता है लेकिन मिलता हमेशा पुरूषार्थ से ही। उन्होंने कहा कि रेखाओं से कभी भाग्य का निर्माण नहीं होता है। भाग्य का निर्माण पुरूषार्थ से ही होता है। उन्होंने कहा कि आज का पुरूषार्थ भविष्य के भाग्य…
