तृप्ति भोग में नहीं, त्याग में-साध्वी संयमलता
उदयपुर। सेक्टर 4 श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी डॉ श्री संयमलताजी म. सा.,डॉ श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती डॉ संयमलता ने ब्रह्मचर्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सबसे श्रेष्ठ तप ब्रम्हचर्य है। तृप्ति भोग में नहीं त्याग में है। जीवन ऊर्जा को भोग में नहीं, आत्म साधना में लगाए। उन्होंने कहा कि सभी दुखों से मुक्त होने के लिए ब्रह्मचर्य ही उत्कृष्ट साधन हैं। महासती ने आगे कहा -काम भोग विष सेवन समान है,…
