पक्षी विचलित, मछलियाँ तनावग्रस्त, विद्यार्थी पढ़ाई प्रभावित — क्या पर्यटकों की मौज मस्ती ही सर्वोच्च प्राथमिकता है?
उदयपुर , 22। फरवरी रविवार को आयोजित झील संवाद में झील क्षेत्र तथा शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और पटाखों के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई । वक्ताओं ने कहा कि झीलों के आसपास स्थित होटलों एवं गार्डनों में सायंकाल एवं रात्रि के समय उच्च डेसीबल स्तर पर साउंड सिस्टम संचालित किए जाते हैं तथा आतिशबाज़ी की जाती है, जिससे स्थानीय पर्यावरण नागरिक जीवन और विद्यार्थी अध्ययन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। झील विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता ने कहा कि पर्यटकों को खुश रखने तथा व्यावसायिक लाभ के लिए ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा से बहुत ऊपर …
