उदयपुर। संगीत और कला के क्षेत्र में अग्रणी उदयपुर के ‘सुरों की मंडली’ संस्थान ने अब शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. विमल शर्मा ने हाल ही में वडोदरा स्थित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ‘फैकल्टी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स’ (महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय) का विस्तृत अवलोकन किया। इसका मुख्य उद्देश्य संगीत शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और नई शैक्षणिक संभावनाओं को तलाशना था।
अवलोकन के दौरान प्रो. विमल शर्मा ने बताया कि वडोदरा का यह संस्थान भारतीय शास्त्रीय संगीत, भरतनाट्यम, तबला, सितार एवं वायलिन जैसे विषयों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के नाट्य प्रशिक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध है। उन्होंने वहां की शिक्षण पद्धति और आधुनिक कला प्रशिक्षण की बारीकियों को समझा, जो संस्थान के भविष्य के विजन के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।
यात्रा के दौरान प्रो. विमल शर्मा ने फैकल्टी के अधिष्ठाता प्रो. अजय अष्टपुत्रे से शिष्टाचार भेंट की। प्रो. अष्टपुत्रे ने ‘सुरों की मंडली’ संस्थान द्वारा कला और समाज के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने भविष्य में संस्थान को हर संभव शैक्षणिक सहयोग और मार्गदर्शन देने का आश्वासन भी दिया।
संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह अवलोकन संगीत शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
सचिव अरुण चौबीसा ने बताया कि इस प्रकार के प्रतिष्ठित संस्थानों के अध्ययन से भविष्य में उदयपुर के स्थानीय छात्रों के लिए बेहतर अवसर और अंतरराष्ट्रीय स्तर का मार्गदर्शन तैयार किया जा सकेगा।
कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने कहा कि इस यात्रा से प्राप्त अनुभवों से संस्थान को संगीत शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा और वैश्विक सहयोग के अवसर प्राप्त होंगे।
संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने इस शैक्षणिक भ्रमण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नए प्रोजेक्ट्स पर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
