उदयपुर, 29 अप्रेल। हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी महाश्रमणीरत्ना महासती श्री प्रभावती जी म.सा. का चार दिवसीय संथारे के साथ देवलोकगमन हो गया।
श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी शान्त-क्रान्ति जैन श्रावक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री सी.ए. विरेन्द्र जैन ने बताया कि महाश्रमणीरत्ना महासती श्री प्रभावती जी म.सा. का 24 अप्रेल को तिलक नगर नवकार भवन जयपुर में चार दिवसीय संथारे के साथ देवलोकगमन हो गया, जिनकी डोल यात्रा 25 अप्रेल को निकाली गई और मोक्षधाम में पंचतत्व में विलीन हुई। डोल यात्रा में भारत के कोने-कोने से श्रावक-श्राविकाओं ने शिरकत की। महासती जी म.सा. पिछले कुछ अर्से से महाव्याधि से ग्रसित थी। महावेदना के क्षणों में भी आपकी सहिष्णुता गजब की रही। आपने बारह वर्ष की उम्र में अपने माता-पिता व भ्राता के साथ 15 फरवरी 1973 के दिन समता विभूति आचार्य श्री नानेश के सान्निध्य में भागवती दीक्षा अंगीकार की थी। आपने 53 वर्षों तक सुदीर्घ संयम पालन करके आप दिवंगत हुई। आपने भारत के सुदूर प्रान्तों में विचरण करके जिनशासन की अद्भुत सेवाएं प्रदान की। बीकानेर के सोनावत परिवार में जन्मी तथा गंगाशहर-भीनासर में दीक्षित साध्वीवर्या के दिवंगत हो जाने से एक अपूरणीय क्षति हुई है।
शान्त-क्रान्ति संघ की महाश्रमणीरत्ना महासती श्री प्रभावती जी म.सा. का संथारे सहित देवलोकगमन
