उदयपुर। देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवसरण में 10 सितम्बर को आयोजित धर्मसभा में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि पर्युषण आत्मा का महापर्व है। तप, त्याग और संयम के माध्यम से ही आत्मकल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि आज मानव भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में आध्यात्मिकता और आत्मचिंतन को भूलता जा रहा है।
डॉ. मुनि ने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मकल्याण की ओर बढ़ना है। इच्छाएं लगातार बढ़ती हैं और इनके बढ़ने से मन अशांत होता जाता है। संयम, संतोष और सद्विचारों के माध्यम से ही इच्छाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है। संयम को अमृत के समान बताते हुए उन्होंने कहा कि यह जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है।
धर्मसभा में डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि पर्युषण आत्मशुद्धि और साधना का पर्व है। इन दिनों व्यक्ति आत्मचिंतन और मनन के माध्यम से स्वयं के भीतर झांकता है। उन्होंने कहा कि संसार के सभी भौतिक पदार्थ परिवर्तनशील हैं, फिर भी मनुष्य उनमें आसक्त हो जाता है। जीवन का प्रत्येक क्षण कम होता जा रहा है, इसलिए समय का सदुपयोग आत्मकल्याण में करना चाहिए।
उपाध्याय रमेश मुनि एवं मुनि दीपेश ने मंगल गान तथा सामूहिक तप-त्याग के प्रत्याख्यान कराए। श्रीसंघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन ने बताया कि नवकार महामंत्र के आठ दिवसीय जाप में सैकड़ों समाजजन भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर अतुल चंडालिया, महेन्द्रसिंह शेखावत एवं उद्योगपति राजेन्द्र हरलालका का अभिनंदन किया गया।
पर्युषण आत्मा का महापर्व, तप-संयम से होता आत्मकल्याणःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
