महाप्रज्ञ विहार में तेरापंथ समाज का धार्मिक आयोजन, मुनिश्री ने बताई सामयिक की विधि, महत्व और मर्यादाएं
उदयपुर। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज के आठ दिवसीय पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन सामयिक दिवस के रूप में मनाया गया। महाप्रज्ञ विहार में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के आज्ञानुवर्ती मुनि संजय कुमार दिवेर, मुनि प्रकाश कुमार दिवेर एवं मुनि सिद्धि प्रज्ञ उज्जैन के सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल की सदस्याओं के मंगलाचरण से हुआ। इस दौरान सामयिक की महिमा पर आधारित सुंदर गीतिका भी प्रस्तुत की गई।
मतदान के लिए किया प्रेरित-धर्मसभा से पूर्व चुनाव प्रत्याशी अतुल चंडालिया ने महाप्रज्ञ विहार पहुंचकर मुनिश्री का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर मुनिश्री ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के मतदान से सरकार का चयन होता है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को समय निकालकर अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए।
सामयिक आत्मशुद्धि और समता का माध्यम
धर्मसभा में मुनिश्री ने सामयिक के महत्व, प्रकार, विधि और आवश्यक सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामयिक आत्मशुद्धि का माध्यम है। यह चित्त को शांत करने के साथ व्यक्ति को आत्मा से जोड़ने का प्रयास कराती है। सामयिक से प्राणी मात्र के प्रति समता, संयम और सहनशीलता का भाव विकसित होता है।
मुनिश्री ने कहा कि सामयिक का मूल अर्थ ही समता है। इसके माध्यम से व्यक्ति बाहरी गतिविधियों से हटकर अपने भीतर लौटता है और आत्मचिंतन करता है। क्रोध जैसी कषायों से बचने तथा अशुभ ध्यान से दूर रहने में भी सामयिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि आसन उपलब्ध हो तो उसका उपयोग करना उचित है, लेकिन आवश्यकता होने पर आंगन में बैठकर भी सामयिक की जा सकती है। सामयिक के दौरान न कुछ लेना चाहिए, न देना और धार्मिक लेखन भी नहीं करना चाहिए। चलती ट्रेन या कार में सामयिक नहीं करनी चाहिए। प्रतिक्रमण किया जा सकता है। बीमारी के कारण बैठने में असमर्थ व्यक्ति लेटे-लेटे भी सामयिक कर सकता है।
मुनिश्री ने तेरापंथ धर्मसंघ की मर्यादाओं और अनुशासन पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी तपस्या समता, सहनशीलता और सद्भाव है। वर्तमान समय में जीवन में समता और अनुशासन का अभाव दिखाई देता है, ऐसे में सामयिक व्यक्ति को इन गुणों के विकास की दिशा दिखाती है। उन्होंने बताया कि तेरापंथ धर्मसंघ में आचार्य की आज्ञा सर्वाेपरि है। चतुर्मास और विहार भी आचार्य की आज्ञा से होते हैं। तेरापंथ सभा उदयपुर के अध्यक्ष राजकुमार कच्छारा और मंत्री राकेश नाहर ने बताया कि शुक्रवार 11 सितम्बर को वाणी संयम दिवस मनाया जायेगा।
पर्युषण के तीसरे दिन गूंजा समता का संदेश, सामयिक से आत्मशुद्धि की ओर बढ़ने का आह्वान
