उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन श्री कल्पसूत्र वाचन का शुभारंभ हुआ। इससे पूर्व हेमंत-हेमलता लोढ़ा एवं परिवार ने साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी की पावन निश्रा में श्री कल्पसूत्र वोहराने का लाभ लिया। इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी के जीवन चरित्र एवं जैन धर्म की गौरवशाली परंपरा से जुड़े कल्पसूत्र ग्रंथ के प्रति श्रद्धा और भक्तिभाव व्यक्त किया गया।
सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति में आयोजित भव्य धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने कहा कि जिन शासन में कल्पसूत्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। पर्युषण आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का महापर्व है। इसकी आराधना से जीवन की बुराइयों और मन के मैल को दूर किया जा सकता है। पर्युषण में आत्मा को पवित्र करने की अद्भुत शक्ति है, आवश्यकता केवल इसे सही भाव से आत्मसात करने की है।
उन्होंने कहा कि पर्युषण के पांच कर्तव्यों में क्षमापना का विशेष महत्व है। क्षमा का भाव आत्मा में उतर जाए तो व्यक्ति का जीवन अत्यंत सुंदर बन सकता है। शरीर नश्वर है, आत्मा ही वास्तविक सत्ता है, इसलिए जीवन रहते मन के विकारों और कषायों को कमजोर करने का प्रयास करना चाहिए।
साध्वी श्रीजी ने गौतम स्वामी के जीवन प्रसंग के माध्यम से सरलता, समर्पण और गुरु भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि गौतम स्वामी महावीर स्वामी से उम्र में बड़े थे, लेकिन भगवान महावीर के सान्निध्य में उनके कषाय शांत हुए और उनमें विनम्रता व समर्पण का भाव विकसित हुआ। आनंद श्रावक को अवधि ज्ञान होने के प्रसंग से उन्होंने कहा कि शिष्य में योग्यता का विकास होना गुरु के लिए भी गौरव का विषय है।
उन्होंने कहा कि कषायों को कमजोर करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है। जिस प्रकार पत्थर एक ही चोट में नहीं टूटता, उसी प्रकार आत्मिक विकार भी लगातार साधना से दूर होते हैं। सौवीं चोट में पत्थर टूटे तो भी पहली चोट का महत्व कम नहीं होता। इसलिए जीवन के शेष समय में भी जागकर आत्मकल्याण की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।
इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमनरुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मयरुचि श्रीजी ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किया।
पर्युषण के तीसरे दिन गूंजा कल्पसूत्र वाचन, साध्वी विद्युतप्रभा ने दिया आत्मशुद्धि व क्षमापना का संदेश,साध्वीजी को कल्पसूत्र वोहराया गया
