उदयपुर। महावीर समवशरण सभागार में धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने 8 सितंबर से प्रारंभ होने वाले पर्युषण पर्व को आत्मचिंतन एवं आत्मशुद्धि का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि अहिंसा, सदाचार, अपरिग्रह, क्षमा, संयम एवं सीमित उपभोग का चिंतन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। व्यक्ति को अपनी भूलों का प्रायश्चित कर वैर-द्वेष त्यागते हुए आत्मा के समीप रहने का प्रयास करना चाहिए।
प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने पर्युषण को आत्मा का उत्सव बताते हुए आठ दिनों में धार्मिक एवं आध्यात्मिक साधना, तप और त्याग करने का आह्वान किया। इस अवसर पर उपाध्याय रमेश मुनि एवं मुनि दीपेश ने मंगल गान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में बेंगलुरु से आए गुरु पुष्कर भवन के ट्रस्टीगण तथा विजय नगर-सुमेरपुर के समाजसेवियों का अभिनंदन किया गया। तपाराधकों का श्रीमती अनिता कटारिया, पूर्व महापौर रजनी जैन, रमेश खोखावत, एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं जीवन सिरोया ने सम्मान किया।
पर्युषण आत्मा के समीप रहने का पर्वःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
