धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव, भक्ति में झूमे श्रद्धालु

– विवेक पार्क में बाल कृष्ण के जन्म पर उमड़ा आस्था का सैलाब
उदयपुर 25 अप्रैल । विवेक नगर सेक्टर-3 स्थित विवेक पार्क में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। कथा वाचक पुष्कर दास महाराज के मुखारविंद से जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग वर्णित हुआ, पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा और श्रद्धालु आनंद में झूम उठे। महाराज ने अपने प्रवचन में कहा भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिव्य चक्षु प्रदान किए द्य जो सत्संग से जुड़ा उसकी बुराइयों पर नियंत्रण हो जाता है द्य आगे कहा जिसने अपने मान का हनन किया वही हनुमान । आगे कहा मनुष्य के जीवन में मोह और अहंकार ही सबसे बड़े बंधन हैं, जिनसे मुक्ति पाने के लिए पूजा-पाठ और सत्संग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से कथा श्रवण करने से मन की अशांति दूर होती है और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। सत्संग के बिना विवेक जागृत नहीं हो सकता, इसलिए जीवन में सत्संग का विशेष महत्व है। उन्होंने श्रावण मास में भगवान शिव की भक्ति करते हुए अहंकार त्यागने का संदेश दिया और बताया कि सच्चा भजन वही है, जिसमें मन परमात्मा से पूर्ण रूप से जुड़ जाए। जहां सत्य होता है, वहीं ईश्वर का वास होता है। कथा के दौरान महाराज ने भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों—मत्स्य, कूर्म (कच्छप), वराह एवं मोहिनी—का उल्लेख करते हुए उनके महत्व को समझाया। साथ ही भागवत के 24 गुरुओं की व्याख्या करते हुए राजा भरत की कथा के माध्यम से मोह के दुष्परिणामों को भी स्पष्ट किया।
दशम स्कंध के प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का जीवंत वर्णन करते हुए बताया कि जब वासुदेव जी ने बालकृष्ण को अपने सिर पर धारण किया, तब सभी बंधन स्वत: ही खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि जब मनुष्य अपने जीवन में भगवान को स्थान देता है, तो उसके सभी बंधन स्वत: समाप्त हो जाते हैं। महाराज ने वर्तमान समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी अनेक घरों में ‘कंस’ जैसी मानसिकता मौजूद है, जो गर्भ में ही बेटियों का जीवन समाप्त कर देती है, जो अत्यंत पाप का कार्य है।
संयोजक विठ्ठल वैष्णव ने बताया कि जैसे ही वासुदेव जी बालकृष्ण को टोकरी में लेकर पंडाल में पहुंचे, पूरा वातावरण “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। सभी श्रद्धालु खड़े होकर भजन-कीर्तन में मग्न हो गए और जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाया। कार्यक्रम के अंत में व्यासपीठ से महाराज ने सभी भक्तों को प्रसाद वितरण कर आशीर्वाद प्रदान किया गया। रविवार को कथा में गिरिराज पूजन के प्रसंग का वर्णन किया जाएगा।

By Udaipurviews

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