जीभ और जीवन में 36 का आँकडा रखों, बाहर और अन्दर में अन्तर मत रखो,सरल बनो, भीतर बाहर एक बनो-संयमज्योति
उदयपुर। समता मूर्ति जयप्रभाश्री म.सा. की सुशिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति ने कहा कि माया मृषावाद पाप झूठ का जाल है। माया का अर्थ कपट मृषण का अर्थ झूठ और वाद का अर्थ बोलना अर्थात कपट सहित झूठ बोलना। साध्वी ने कहा कि क्रोध, मान और लोभ तो बाहर से प्रकट हो जाते है परंतु कपट तो गुप्त रहता है। इसलिए शास्त्र में माया को नागिन की उपमा दी गई है। सर्प डसने पर तो व्यक्ति के बचने की संभावना रहती है परंतु नागिन के डसने पर बचने की गुंजाइश नही रहती। साध्वी ने कहा कपट का साम्राज्य सर्वत्र फैला…
