दया और अहिंसा ही सच्चे धर्म का सार, ‘जियो और जीने दो’ का दिया संदेश
उदयपुर, 14 अगस्त। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित धार्मिक प्रवचन में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने दया और अहिंसा को संसार के समस्त धर्मों का सार बताते हुए कहा कि दया सभी धर्मों की मूल भावना है और अहिंसा धर्म का आधार है। संसार में जितने भी धर्म हैं, उनमें अहिंसा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि जिस प्रकार किसी भवन की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है, उसी प्रकार जीवन रूपी धर्म की नींव अहिंसा पर टिकी है। वर्तमान समय में मनुष्य स्वार्थ के वशीभूत होकर हिंसा…
