भाजपा पार्षद राजेश चपलोत की पत्नी ममता निर्दलीय मैदान में, 13-12 के गणित में बढ़ी सियासी हलचल

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

नामांकन के बाद बदले समीकरण, पालिका परिसर में कांग्रेस समर्थकों की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय; चेयरमैन चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी

फतहनगर। फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका के चेयरमैन पद के चुनाव से पहले सियासी समीकरणों में अचानक नया मोड़ आ गया है। भाजपा के पार्षद राजेश चपलोत की पत्नी ममता चपलोत के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खास बात यह है कि पालिका में भाजपा के 13 और कांग्रेस के 12 पार्षद हैं। ऐसे में एक निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में उतरने से चेयरमैन चुनाव का गणित और दिलचस्प हो गया है।

ममता चपलोत के नामांकन दाखिल करने की जानकारी सामने आते ही नगरपालिका परिसर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। नामांकन के बाद पालिका परिसर में कांग्रेस से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी देखने को मिली, जिसके बाद संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। हालांकि, किसी दल द्वारा ममता चपलोत को समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।

राजेश चपलोत का स्थानीय राजनीति में पुराना अनुभव

ममता चपलोत के निर्दलीय मैदान में उतरने के घटनाक्रम को उनके पति राजेश चपलोत के राजनीतिक अनुभव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राजेश चपलोत लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं। वे नगरपालिका के उपाध्यक्ष रह चुके हैं तथा एक कार्यकाल में अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत के भतीजे भी हैं।

पिछले नगरपालिका चुनाव में राजेश चपलोत महज एक वोट के अंतर से अपनी सीट हार गए थे। इस बार टिकट वितरण के दौरान पार्टी के भीतर असंतोष और कथित भीतरघात की चर्चाओं के बावजूद उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर वापसी की। अब उनकी पत्नी का निर्दलीय नामांकन स्थानीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता नजर आ रहा है।

13-12 के आंकड़े में तीसरे उम्मीदवार की एंट्री

फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका के 25 वार्डों के चुनाव परिणाम में भाजपा ने 13 और कांग्रेस ने 12 सीटें हासिल की हैं। यानी भाजपा के पास बहुमत के लिए आवश्यक संख्या से महज एक सीट अधिक है। ऐसे में ममता चपलोत के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सामने आने के बाद पार्षदों के रुख और संभावित समर्थन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि कांग्रेस प्रत्याशी सोसर ने भले ही कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया है, लेकिन क्या कांग्रेस खेमे में निर्दलीय ममता चपलोत के विकल्प पर भी विचार हो सकता है? फिलहाल यह केवल राजनीतिक कयास हैं और कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

भाजपा के लिए भी चुनौती, कांग्रेस के लिए भी अवसर की चर्चा

13-12 के मौजूदा संख्या बल में भाजपा एक सीट आगे है, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में उतरने के बाद अब केवल संख्या बल ही नहीं, बल्कि पार्षदों के आपसी राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

ममता चपलोत के नामांकन ने भाजपा खेमे में भी चर्चाओं को जन्म दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा के सभी 13 पार्षद एकजुट रहते हैं या आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों में कोई बदलाव देखने को मिलता है। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 12 पार्षद हैं और उसे चेयरमैन पद के लिए अपने पक्ष में संख्या जुटाने के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी।

नामांकन के साथ ही शुरू हुआ जोड़-तोड़ और रणनीति का दौर

ममता चपलोत के नामांकन की खबर सामने आने के बाद नगरपालिका परिसर में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाजाही बढ़ गई। इसके साथ ही पार्षदों के संभावित रुख, आपसी संपर्क और समर्थन को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

अब तक चुनावी तस्वीर भाजपा बनाम कांग्रेस के बीच सीधी नजर आ रही थी, लेकिन निर्दलीय ममता चपलोत की एंट्री ने मुकाबले को त्रिकोणीय राजनीतिक समीकरणों की ओर मोड़ दिया है। हालांकि अंतिम तस्वीर चुनावी प्रक्रिया और पार्षदों के वास्तविक रुख से ही स्पष्ट होगी।

फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका में 13-12 के आंकड़े के बीच एक निर्दलीय नामांकन ने चेयरमैन पद के चुनाव की दिलचस्पी बढ़ा दी है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कौन किसके साथ खड़ा होता है और चेयरमैन पद की दौड़ में अंतिम समीकरण किस करवट बैठते हैं।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!