उदयपुर, 16 सितम्बर । सुथार समाज भवन, मेन रोड, बडग़ांव में श्री पुष्कर दास महाराज के सान्निध्य में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव के तीसरे दिन महाराज ने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि उस समय कथा में अनेक ऋषि-मुनि, संत और महात्मा उपस्थित थे, लेकिन परम ज्ञानी शुकदेव जी विशेष रूप से राजा परीक्षित के कल्याण के लिए पधारे थे। इसका संदेश यही है कि भगवान की कृपा उसी पर होती है जो सच्चे मन से भक्ति, सत्संग और आत्मकल्याण की भावना रखता है। आगे कहा उत्तानपाद की दो रानी होती है सुरुचि और सुनीति द्य सत्संग में बैठे वही सुनीति है द्य सांसारिक सुख सुविधा में जो होता है उसे सुरुचि कहते हे द्य जो सुनीति (ज्ञान) के आधीन होता है उसे शाश्वत सुख (ध्रुव) मिलता है द्य 5 साल का बालक भक्ति करने जाता है रास्ते में नारद जी मिलते हे नारद जी बालक को मंत्र दीक्षा देते हे ? नमो भगवते वासुदेवाय और इसी मंत्र को ध्रुव जी जाप करते हे और उन्हें जंगल में भगवान विष्णु दर्शन देते हे द्य आगे महाराज ने भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का उल्लेख करते हुए मत्स्य, कच्छप, वराह और मोहिनी अवतार की महिमा का वर्णन किया। साथ ही भागवत के 24 गुरुओं की व्याख्या करते हुए जीवन में उनसे मिलने वाली शिक्षाओं को समझाया। उन्होंने ऋषभदेव भगवान का उल्लेख करते हुए बताया कि वे भी भागवत परंपरा से जुड़े हैं। वहीं राजा भरत के प्रसंग के माध्यम से समझाया कि मोह में फंसने से मनुष्य को जन्म-जन्मांतर तक भटकना पड़ता है। राजा भरत ने हिरण के बच्चे के मोह में पडक़र अगले जन्म में हिरण योनि प्राप्त की, जो यह दर्शाता है कि आसक्ति मनुष्य के पतन का कारण बनती है।श्रीकृष्ण के भजनों और कथा प्रसंगों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा तथा श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त किया। बुधवार को कथा में गौरीशंकर अग्रवाल,राजेश अग्रवाल,आनंद प्रकाश बेदी, विनोद अग्रवाल,संजय आदि उपस्थित रहे ।
बडग़ांव में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र एवं राजा भरत प्रसंग का वर्णन
