69 वें श्रमिक शिक्षा स्थापना दिवस पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

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श्रमिकों को शिक्षा के साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना जरूरी – कुलपति प्रो. मांडोत
वक्ताओं ने योजनाओं की जानकारी आम श्रमिक तक पहुंचाने पर दिया जोर ……..

उदयपुर, 16 सितम्बर। 69वें श्रमिक शिक्षा स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को प्रतापनगर स्थित राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति सचिवालय सभागार में ‘श्रमिक शिक्षा 2.0- विकसित भारत 2047 के लिए कार्यबल को भविष्य के लिए तैयार करने में श्रमिक शिक्षा की भूमिका’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशालय उदयपुर की क्षेत्रीय सलाहकार समिति की ओर से आयोजित संगोष्ठी में श्रमिकों को शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर चर्चा हुई। इस अवसर पर क्षेत्रीय सलाहकार समिति की बैठक भी आयोजित की गई। समारोह में नवनियुक्त कुलपति प्रो. मंजु मांडोत का शॉल, उपरणा एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में पदेन सचिव एवं वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी जगदीप सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए वर्ष 2026-27 का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए श्रमिकों को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने ई-श्रम पोर्टल सहित श्रमिकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और इनके प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

मुख्य अतिथि राजस्थान विद्यापीठ की कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने कहा कि विकास की आधारशिला शिक्षा है। असंगठित श्रमिकों के सामने नियमित रोजगार की समस्या प्रमुख है। रोजगार के साथ शिक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए श्रमिक और गांवों को समझना होगा तथा उन्हें सुदृढ़ करना होगा। श्रमिकों को मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, श्रमिकों के श्रम की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान विद्यापीठ के संस्थापक मनीषी पंडित नागर ने वर्ष 1937 में कामकाजी श्रमजीवियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से रात्रिकालीन श्रमजीवी कॉलेज की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में असंगठित श्रमिक अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित हैं। जरूरत है कि योजनाओं का लाभ पात्र श्रमिकों तक पहुंचे।

क्षेत्रीय निदेशक पुनीत गौतम ने केंद्र एवं राज्य सरकार की श्रमिक कल्याण योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि योजनाओं का अधिकाधिक लाभ पहुंचाने के लिए प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। ई-श्रम पोर्टल असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने का माध्यम है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना के तहत पात्र असंगठित श्रमिकों के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का प्रावधान है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से पात्र लोगों को जीवन एवं दुर्घटना बीमा सुरक्षा मिलती है। वहीं अटल पेंशन योजना के जरिए पात्र व्यक्ति पेंशन की व्यवस्था कर सकते हैं।

संगोष्ठी में राजकुमार गौड़, कॉमरेड गोपी किशन, सिस्टर कीर्ति कैथरीन डेविड मेकवान, पवन तलेसरा, गजेन्द्र सिंह, नदीम खान, सुभाष श्रीमाली, योगेन्द्र शर्मा, रमेश कुमार सोनी और बालकृष्ण शुक्ला सहित अन्य वक्ताओं ने श्रमिकों की स्थिति मजबूत करने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने को लेकर विचार व्यक्त किए।

By Udaipurviews

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