शहर की पहाड़ियों एवं झीलों के संरक्षण पर हुई चर्चा
उदयपुर, 28 अक्टूबर। नगर निगम क्षेत्र उदयपुर हेतु बनाई गई जैव विविधता प्रबंधन समिति की बैठक का आयोजन शनिवार को समिति अध्यक्ष एस.के.वर्मा की अध्यक्षता में हुआ। बैठक में प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष राहुल भटनागर और सदस्य सचिव ओ.पी.शर्मा भी उपस्थित थे। विशेष आमंत्रित सदस्य ग्रीन पीपल सोसायटी के सदस्य सचिव पर्यावरणविद् डॉ. सतीश शर्मा उपस्थित रहे।
बैठक में अध्यक्ष वर्मा ने सभी का स्वागत करते हुए उदयपुर शहर की कटती हुई पहाड़ियों एवं यहां की झीलों पर पड़ रहे प्रभावों पर चर्चा करते हुए चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि शहर के आसपास गत वर्षों से तेजी से पहाडियों की कटाई व समतलीकरण आवासीय एवं होटल प्रयोजनार्थ हो रहा है। इससे शहर की हरियाली, आबोहवा, जैव विविधता एवं झीलों की पारिस्थितिकीय हालत प्रभावित हो रही है। हाल के दिनों में समाचार पत्रों में भी इस आशय के समाचार प्रकाशित हो चुके है एवं चिंता व्यक्त की गई है। आमजन भी उद्वेलित है। उन्होंने बताया कि इस समस्या पर उन्होंने एवं विशेषज्ञों की टीम ने शहर एवं उसके बाहर दूर तक अध्ययन कर यह जानकारी जुटाई थी कि कहां कितनी कटाई हो रही है। कौन से क्षेत्र ज्यादा प्रभावित है एवं पहाड़ों तथा झीलों की सुरक्षा हेतु क्या किया जा सकता है। यह अध्ययन डोक्यूमेंट ग्रीनर उदयपुर प्लांट फॉर एन्ट्रेसिंग नेचुरल ग्रीन्स विद् बायोडायवर्सिटी वर्ष 2017 में तैयार किया गया। वर्ष 2019 में इसे नगर निगम उदयपुर को भी सौंपा गया था। चूंकि पहाड़ एवं झील संरक्षण एक महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दा है। अतः इस पर सकारात्मक प्रभावी कार्यवाही करते रहने की आवश्यकता है।
इसी भावना को ध्यान में रखते हुए जैव विविधता प्रबंधन समिति अध्यक्ष वर्मा ने यह डोक्यूमेंट ग्रीन पीपल सोसायटी के सदस्य सचिव डॉ. सतीश शर्मा को सौंपा एवं अपेक्षा की है कि भविष्य में इस डोक्यूमेंट के निष्कषों का उपयोग शहर की पहाड़ियों एवं झीलों के संरक्षण में किया जाए। उन्होंने आशा जताई कि इस डोक्यूमेंट के निष्कर्ष संबंधी ऑथोरिटी तक भी पहुंचेंगे ताकि शहर की सुंदरता वैभव एवं पारिस्थितिकी को संरक्षित किया जा सके। इससे शहर की आबोहवा अच्छी रहेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
