युवाओं की सोच, विचार, विजन और सपनों को लेकर हुई गहन चर्चा
राजसमंद, 2 सितम्बर। राज्य सरकार के निर्देशानुसार राज्य के चहुंमुखी विकास एवं प्रदेशवासियों की खुशहाली और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने तथा राजस्थान को वर्ष 2030 तक अग्रणी राज्य बनाने के उद्धेश्य से विकसित राजस्थान हेतु विजन दस्तावेज 2030 (वीजन डॉक्यूमेन्ट 2030) तैयार किये जाने के संबंध में शनिवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला परिषद सीईओ राहुल जैन की अध्यक्षता में युवाओं के साथ परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राजकीय सेवाओं में भर्ती हेतु आवेदन के इच्छुक युवाओं के साथ भविष्य को लेकर युवाओं की सोच, विचार, विजन, सपनों को लेकर चर्चा की गई। कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कलक्टर नरेश बुनकर भी मौजूद रहे। सीईओ राहुल जैन ने सभी के विचार सुने और उनको नोट किया। कार्यक्रम में युवाओं ने 2030 तक राजस्थान को हर क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य बनाने की दिशा में उपयोगी सुझाव दिए। युवाओं ने कैरियर, शिक्षा, रोजगार के अवसर सहित कई विषयों पर अपनी बात कही। उनके सुझावों को अब विजन दस्तावेज 2030 हेतु भेजा जाएगा जो राज्य सरकार द्वारा बनाई जाने वाली नीतियों में सहायक सिद्ध होंगे।
राजस्थान मिशन 2030 को लेकर संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने दिए सुझाव
संस्थाओं ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव, विजन दस्तावेज 2030 के लिए भेजेंगे
प्रदेश के चहूँमुखी विकास और राजस्थान को वर्ष 2030 तक देश का नंबर वन स्टेट बनाने हेतु अभियान ‘राजस्थान मिशन 2030’ के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘विजन दस्तावेज 2030’ के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विभिन्न सेवा क्षेत्रों से प्रतिभागियों ने अपनी राय दी।
सेवा मंदिर से ज्योति टांक ने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों की आधारभूत व्यवस्था यथा भवन, शौचालय, खेलकूद के मैदान को विकसित किया जाना अति आवश्यक है। साथ ही बाल शिक्षा केंद्रित भवन बनाया जाए।
जतन संस्थान के रणवीर सिंह ने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रो की कार्यकर्ताओं के लिए अलग से ट्रेनिंग सेंटर प्रत्येक जिले में जिला स्तर पर होना चाहिए ताकि उनका आमुखीकरण किया जा सके और जिससे नवाचार आईसीडीएस में भी लागू करने में आसानी रहे।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से स्वाति भंडारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्री स्कूल शिक्षा को प्रभावी बनाया जाने के साथ ही शिक्षा विभाग से लगाए गए मेंटोर टीचर का आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय से शिक्षा में सुधार किया जा सकता है।
प्लान इंडिया से अर्पिता द्वारा बताया गया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों के बालक जो कि कुपोषित या अतिकुपोषित होते हैं उन्हें इलाज के लिए मेडिकल विभाग जैसे आशा, एएनएम द्वारा समय पर चिन्हित कर लिया जाए और उनको एमटीसी रेफर करने के साथ ही पुनः घर तक लाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। बालकों के उपचार हेतु कुपोषण उपचार केंद्र प्रत्येक ब्लॉक में होना चाहिए ताकि कुपोषण से मुक्ति दिलाई जा सके।
सेव द चिल्ड्रन संस्थान के भंवर शर्मा ने बताया कि बालकों में सर्वागीण विकास हेतु आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका के अलावा भी माता-पिता की भूमिका भी होनी चाहिए ताकि बालकों को सीखनें में आसानी रहे। प्री स्कूल शिक्षा के साथ ही कार्यकर्ताओं का समय-समय पर प्रशिक्षण करवाया जाना अति आवश्यक है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी विपुल जोशी ने बताया कि मिशन 2030 के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों का ढांचागत सुधार के साथ-साथ पूर्व प्राथमिक शिक्षा मानदेय कर्मियों का चयन निर्धारित मापदंड के तहत तथा पोषाहारयुक्त गुणवत्ता यथा प्रोटीन, आयरन आदि तत्वों को शामिल करते हुए, फल सब्जियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
महिला पर्यवेक्षक सुधा मेवाड़ा ने अपनी राय व्यक्त करते हुए बताया कि न्यूनतम 750 की आबादी पर एक आंगनबाड़ी केंद्र होना चाहिए ताकि इस आईसीडीएस की सेवाओं को प्रत्येक लाभार्थी तक भिजवाया जा सकें। साथ ही कार्यकर्ताओं के लिए आईएलए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करवाने चाहिए।
सीमा टेलर ने बताया कि कुपोषित बालकों के उपचार हेतु आंगनबाड़ी केदो को ग्रोथ मॉनिटरिंग के उपकरण उपलब्ध करवाया जाए तथा उन्हें सही ढंग से क्रियान्वित करने हेतु प्रषिक्षण भी दिया जाए।
बिलकिस बानो ने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्री स्कूल शिक्षा का प्रभावी माध्यम मनाया जाए। साथ ही प्रत्येक बालक का रिपोर्ट कार्ड जारी हो, ताकि वह बालक कक्षा एक में एडमिशन उस कार्ड के माध्यम से ले सके।
उपेंद्रनाथ देव ने बताया कि प्रत्येक सेक्टर पर महिला पर्यवेक्षक स्तर हेतु कार्यालय खोला जाना चाहिए तथा उन्हे सेक्टर स्तर पर कार्मिक व कंप्यूटर उपलब्ध कराया जायें ताकि आसानी से सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मधु सालवी ने बताया कि आंगनबाड़ी बहनों का मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही वितरण किये जाने वाले खिलौने बाल केंद्रित होने चाहिए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किरण जोशी ने बताया कि नामांकन बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए बिजली, पानी, शौचालय की सुविधा होनी चाहिए। ग्रामीण विकास पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों की विभाग में प्रभावी भूमिका होनी चाहिए।
इसके अलावा विभिन्न क्षेत्र से आये प्रतिनिधियों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र बालचित्र कारी युक्त, खिलोने, खेलकूद की सामग्री की उपलब्धता करवाई जानी चाहिए। साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा बालकों को देनी चाहिए। माताओं के साथ सरपंच वार्ड पंच जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति और प्रभावी निगरानी होनी चाहिए। प्रत्येक गांव में आंगनबाड़ी मॉनिटरिंग कमेटी होनी चाहिए। साथ ही मानव संसाधन की अधिक से अधिक समय पर भर्ती होनी चाहिए। बालकों को दिए जा रहे हैं पोषाहार में मोटा अनाज यथा बाजरा, रागी, दालों आदि को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर वार्षिक उत्सव का आयोजन भी किया जाना चाहिए। लाभार्थियों को हर तरह की सूचना मोबाइल व मैसेज के माध्यम से दी जाने की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। कार्यशाला में उपनिदेशक एन.एल. मेघवाल, रणजीत सिंह, निर्दोष कुमार, रणजीत सिंह भाटी राहुल साकदीपीय, प्रकाश जाट, संजय राव, दिनेश कुमार इत्यादि उपस्थित थे।
रसद विभाग की संगोष्ठी 5 सितंबर को
राजस्थान मिशन 2030 के तहत विजन दस्तावेज 2030 के निर्माण में प्रदेश के प्रबुद्धजनों, विषय-विशेषज्ञों, हितधारकों, युवाओं एवं समाज के सभी वर्गो के सुझावों व प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं को सम्मिलित किया जा रहा है। डीएसओ संदीप माथुर ने बताया कि यह अभियान राज्य में मिशन के रूप में 15 अगस्त से 30 सितम्बर तक संचालित किया जाएगा। रसद विभाग के विकसित राजस्थान-2030 दस्तावेज को तैयार किये जाने हेतु हितधारकों के साथ परामर्श गतिविधि कर सुझाव आमंत्रित किए जाने हेतु जिला स्तर के हितधारकों जैसे विभागीय अधिकारियों, कार्मिकों, स्वंयसेवी संस्थाओं, प्रबुद्धजन, राशन डीलर संगठन, विषय-विशेषज्ञ, उपभोक्ता संग्ठनों के पदाधिकारी, एलपीजी, ऑयल कम्पनी के प्रतिनिधि, सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, व्यापार संगठन एवं लाभार्थी आमजन सहित सदस्यों को हितधारक के रूप में सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसे लेकर 5 सितंबर मंगलवार को दोपहर 12:15 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में राजस्थान मिशन-2030 हेतु सभी वर्गो के सुझावों व आकांक्षाओं को सम्मिलित किये जाने हेतु एक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।
