– आचार्य श्री ने दिए जीवन को सार्थक बनाने के प्रेरक सूत्र
– आयड़ जैन तीर्थ में चार माह तक अनवरत बहेगी धर्म ज्ञान की गंगा
उदयपुर, 27 जुलाई। तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन तीर्थ में मालव मार्तंड आचार्य भगवंत मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज एवं अचलमुक्ति सागर सूरीश्वर महाराज सहित ठाणा-4 की आयड़ तीर्थ में चातुर्मास की धूम अब चार माह तक जारी रहेगी।
महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आचार्य मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज ने अपने मांगलिक प्रवचन में जीवन के मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ज्ञान देते हैं, पिता संघर्ष करना सिखाते हैं, माता संस्कारों का पाठ पढ़ाती हैं, जबकि दुनिया, समय और परिस्थितियां व्यक्ति को जीवन के शेष महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि परमात्मा को वही जीवन प्रिय है जिसमें करुणा से भरी आंखें, श्रद्धा से झुका हुआ मस्तक, सेवा में तत्पर हाथ, सन्मार्ग पर चलते कदम और सत्य बोलने वाली वाणी हो। यदि मनुष्य इन गुणों को अपने जीवन में उतार ले, तो उसका जीवन स्वयं धर्ममय और सफल बन जाता है। इस अवसर पर चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाली विभिन्न धार्मिक आराधनाओं, तप, साधना और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की भी जानकारी दी गई। श्रद्धालुओं को आगामी चार माह तक विविध धार्मिक आयोजनों के माध्यम से आत्मकल्याण और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि चातुर्मास के चार माह के दौरान आयड़ जैन तीर्थ में विशेष आराधना, तपस्या, साधना, प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठान एवं अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनका लाभ बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्राप्त करेंगे।
इस अवसर पर कुलदीप नाहर, भोपाल सिंह नाहर, अशोक जैन, संजय खाब्या, भोपाल सिंह परमार, सतीश कच्छारा, चतर सिंह पामेचा, राजेन्द्र जवेरिया, अंकुर मुर्डिया, पिन्टू चौधरी, हर्ष खाब्या, गजेन्द्र खाब्या, नरेन्द्र सिरोया, राजू पंजाबी, रमेश मारू, सुनील पारख, पारस पोखरना, राजेन्द्र जवेरिया, प्रकाश नागौरी, दिनेश बापना, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, गोवर्धन सिंह बोल्या, दिनेश भंडारी, रविन्द्र बापना, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता आदि मौजूद रहे।
परमात्मा को वही जीवन प्रिय है जिसमें करुणा से भरी आंखें, श्रद्धा से झुका हुआ मस्तक हो : आचार्य मुक्तिसागर सूरीश्वर
