95वें स्थापना दिवस पर विद्या भवन ने दोहराया  संकल्प

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें
संवेदनशील , दक्ष, कुशल तथा  जिम्मेदार नागरिक  निर्माण के  विद्या भवन का मूल विचार रखेंगे  जीवंत 
जिला कलेक्टर तथा आर एस एम एम के एम डी ने दिए  प्रेरक संदेश 
हजारों विद्यार्थियों-शिक्षकों ने रैली के माध्यम से दिया पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और जागरूक नागरिकता का संदेश 
उदयपुर, 21 जुलाई। वर्ष 1926 में जन्मे विद्या भवन के विचार के सौ वर्ष पूर्ण होने और संस्था की स्थापना के 95 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मंगलवार को विद्या भवन  स्थापना दिवस  उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया।
यह  कार्यक्रम  अतीत की उपलब्धियों के  उत्सव के साथ साथ  साथ  भविष्य के प्रति विद्या भवन की प्रतिबद्धता की पुनः अभिव्यक्ति बना।  एक स्वर में संकल्प लिया गया कि समय और तकनीक बदलेंगे, शिक्षा के माध्यम बदलेंगे, लेकिन शिक्षा के माध्यम से संवेदनशील , दक्ष, कुशल तथा  जिम्मेदार नागरिक और बेहतर समाज के निर्माण का विद्या भवन का मूल विचार सदैव जीवंत रहेगा।
समारोह की शुरुआत विशाल जन-जागरूकता रैली से हुई। विद्या भवन के हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, कार्यकर्ताओं, प्रबंधन समिति सदस्यों, पूर्व विद्यार्थियों और विद्या भवन के शाश्वत मूल्यों में विश्वास रखने वाले जागरूक नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।  जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल  ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने विद्या भवन के प्रेरणादायी इतिहास और शिक्षा एवं समाज निर्माण में उसके योगदान को उदयपुर का गौरव माना।
रैली विद्या भवन से फतेहसागर पहुंची। विद्यार्थियों ने आकर्षक तख्तियों और बैनरों के माध्यम से उदयपुर को रामसर वेटलैंड सिटी  के रूप में मिली पहचान पर हर्ष व्यक्त किया। रैली में झील सुरक्षा,  पर्यावरण संरक्षण, जिम्मेदार नागरिकता, महिला सम्मान, सामाजिक समरसता, समावेशी एवं समग्र शिक्षा, उन्नत कृषि और कौशल विकास जैसे विषयों पर प्रभावी संदेश दिए गए।
विद्या भवन के ओपन एयर थिएटर में आयोजित मुख्य समारोह में राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पी. रमेश ने कहा कि मूल्यों, नागरिकता और समाज विकास के प्रति दृढ़ संकल्प, विश्वास और निरंतर परिश्रम के कारण ही विद्या भवन 95 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पूरी कर सका है। मोबाइल की लत के कारण अपने एक निकट संबंधी की जीवन-क्षति का उल्लेख करते हुए उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि बच्चों, किशोरों और युवाओं को मोबाइल की लत और मोटापे से बचाना आज बड़ी चुनौती है। उन्हें अनुशासित और स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे का सहपाठियों अथवा शिक्षकों द्वारा उपहास या उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। इस विषय में विद्या भवन की संवेदनशीलता संतोष और विश्वास पैदा करती है।
विद्या भवन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार तायलिया  ने कहा कि विद्या भवन के मूल विचार ने सौ वर्ष की यात्रा पूरी कर ली है और पांच वर्ष बाद संस्था अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण करेगी। शताब्दी की ओर अग्रसर विद्या भवन नए कार्यक्रमों, नवाचारों और आधुनिक शिक्षा के माध्यम से देश की श्रेष्ठतम शिक्षण संस्थाओं में स्थान बनाने के लिए उत्सुक और गतिशील है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए विद्या बंधु चंद्र सिंह के. मेहता  ने अपने स्कूली जीवन की स्मृतियां साझा कीं और कहा कि उनकी सफलता की नींव विद्या भवन में मिली शिक्षा और संस्कारों में निहित है।
  विद्या भवन के मुख्य संचालक एवं पूर्व संभागीय आयुक्त राजेंद्र भट्ट ने कहा कि विद्या भवन समाज के प्रत्येक वर्ग को  समग्र और बहुआयामी व्यक्तित्व का निर्माण करने वाली शिक्षा से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है।
स्थापना दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए नवस्थापित विद्या भवन पौध नर्सरी का   पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएफएस अधिकारी इंदर पाल सिंह मथारू तथा विद्या भवन के उपाध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऊर्जा अभियंता भगवत बाबेल  ने उद्घाटन किया।
समारोह में   विद्या भवन की स्थापना यात्रा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति, महिला सशक्तिकरण पर प्रेरक नाटक, राजस्थान की लोकसंस्कृति को जीवंत करती गवरी  एवं  शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, नारी सम्मान, सामाजिक जागरूकता और भारतीय जीवन मूल्यों का सशक्त संदेश समेटे अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
By Udaipurviews

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