कषाय भाव छोड़ क्षमाभाव अपनाएं, तभी जीवन में आएगा सच्चा सुख
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान संतश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन में सुख की तलाश करता है, लेकिन वास्तविक सुख बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि मन की शांति और आत्मिक संतोष में निहित है। कषाय भावों का त्याग कर क्षमा, संयम और सद्भाव को जीवन में अपनाने से ही सच्चे सुख की अनुभूति संभव है। उन्होंने कहा कि सुख के पीछे दुःख और दुःख के पीछे सुख चलता रहता है। मनुष्य सुख प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करता है, लेकिन पांच इंद्रियों और मन के पीछे भागते हुए…
