कामयाबी की पहली सीढ़ी कोशिश है, सफल हो गए तो स्पीड बढ़ जाती है, गलती हुई है तो तजुर्बा दे जाती है : आचार्य विजयराज
उदयपुर, 14 सितम्बर। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय वर्षावास में शनिवार को हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने फरमाया कि बत्तीस आगमों में से एक भगवती सूत्र में जीव अर्थात् आत्मा की पांच शक्तियां बतलाई गई हैं-उत्थान शक्ति, कर्म शक्ति, बल, वीर्य अर्थात् उत्साह की शक्ति एवं पुरूषाकार पराक्रम की शक्ति। ये पांचों शक्तियां अन्य जीवों की अपेक्षा से मनुष्य में अधिक अनावृत होती है। मनुष्य अपनी इन शक्तियों को पहचान कर इसका भलीभांति उपयोग कर सकता है। सरल शब्दों में उठो, कर्म करो, शक्ति लगाओ, उत्साह के साथ पुरूषाकार पराक्रम करो तो अनंत वीर्य भी प्रकट हा…
