उदयपुर। राज्य सरकार के प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया और प्रमुख शासन सचिव स्वास्थ्य विभाग गायत्री राठौड़ तथा आरजीएचएस की तरफ़ से हरजीराम अटल एव अन्य अधिकारियों के साथ सचिवालय में बैठक आयोजित कर आरजीएचएस योजना के भावी स्वरूप को लेकर प्रदेश के प्रमुख कर्मचारी नेताओं के साथ चर्चा की। राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ उदयपुर के जिलाध्यक्ष हेमंत पालीवाल ने बताया कि बैठक में योजना से अचानक राज्य सरकार पर बढ़े बेतहाशा वित्तीय भार का हवाला देते हुए इसकी उचित मॉनिटरिंग को लेकर इसे इंशोरेंस मॉड पर निजी कंपनी को सौंप कर इसकी प्रभावी मॉनिटरिंग करवाने और वितीय भार कम करने की दिशा में कर्मचारी संगठनों से अपनी सहमति चाही थी। बैठक में प्रदेश के कुल 15 कर्मचारी नेता मौजूद रहे। इनमें अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ की तरफ़ से महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष महावीर प्रसाद शर्मा और महामंत्री महावीर सिहाग के साथ महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र फोगाट ने भाग लेकर इस योजना को इंश्योरेंस मोड पर देने का पुरजोर विरोध करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेताया कि आरजीएचएस योजना में भ्रष्टाचार कर रहे चंद अस्पतालों और फार्मेसी वालों तथा कर्मचारियों की वजह से आम निर्दोष कर्मचारी के चिकित्सा संबंधी अधिकारों पर कुठाराघात नहीं होने देंगे एवं योजना के मूल स्वरूप में कोई भी छेड़छाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संयुक्त महासंघ के जिला महामंत्री लच्छीराम गुर्जर ने बताया कि यदि राज्यसरकार ऐसा करने की कोशिश करती है तो प्रदेश का कर्मचारी सड़कों पर उतर कर एक ऐसा आंदोलन खड़ा करेगा जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी। इसी श्रृंखला में 12 मई को जिला स्तर पर महासंघ की जिला कार्यकारियों के द्वारा चिकित्सा मंत्री का पुतला दहन किया जाएगा एवं 15 मई से 25 मई तक चिकित्सा मंत्री के राजकीय दौरों का बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संयुक्त महासंघ के आईटी प्रभारी जसवंत सिंह चौहान ने बताया कि वार्ता में अधिकारियों ने इस योजना को इंशोरेंस मॉड पर देने के अंतिम निर्णय पर रोक का आश्वासन दिलाते हुए इस पर संगठनों के प्रतिनिधियों से पुनः विस्तृत चर्चा कर कोई सार्थक हल निकालने का भरोसा दिलाया। वर्ष 2021-22 में 600 करोड रुपए से प्रारंभ हुई योजना वर्ष 2025- 26 में 4300 करोड रुपए के वार्षिक खर्च पर पहुंच गई है। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि इंश्योरेंस कंपनी भी प्रभावी मॉनिटरिंग के द्वारा ही भ्रष्टाचार एवं गलत व्यय हो रही राशि पर अंकुश लगाएगी तो यह कार्य सरकारी कर्मचारी अधिकारी क्यों नहीं कर सकते, इसके लिए 500 कर्मचारियों /अधिकारियों की अलग से स्टाफ सेल बनाया जाए।
आरजीएचएस योजना के मूल स्वरूप के साथ नहीं होने देंगें कोई भी छेड़छाड़
