उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में बुधवार को नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कर्मसत्ता, आत्मशुद्धि और गुरु भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति के बाद परमात्मा ने अनादिकाल से आत्मा पर जमी कर्मों की मलीनता को दूर कर उसे निर्मल बनाया। जीवन में परमात्मा का शासन और आत्मा का आसन मिल जाए तो बड़े से बड़ा भौतिक कष्ट भी स्वीकार्य है।
उन्होंने कहा कि जीवन में साधन-सुविधाएं मिलना कर्मसत्ता के अधीन है, लेकिन उनका सदुपयोग करना हमारे हाथ में है। व्यापार करना हमारे पुरुषार्थ में है, लेकिन लाभ प्राप्त होना कर्मसत्ता पर निर्भर करता है। स्वस्थ शरीर मिला है तो उसका सदुपयोग या दुरुपयोग करना हमारे भावों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि मिलना अलग बात है और मिले हुए का सदुपयोग करना अलग।
गुरु भक्ति पर उन्होंने कहा कि केवल जिनवाणी सुनना पर्याप्त नहीं, उसे जीवन में उतारना जरूरी है। गुरु वचनों पर अटूट श्रद्धा और निरंतर अभ्यास ही ज्ञान का मार्ग खोलता है। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना, नमन रुचि, योगरुचि एवं तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।
कर्मसत्ता से मिलता है अवसर, सदुपयोग हमारे हाथ: साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
