उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने गुरुवार को कर्मयोग, औचित्य, परोपकार और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आने वाली चौबीसी के तीर्थंकर अमंग सहित भूत, वर्तमान और भविष्य के सभी तीर्थंकरों को चौत्यवंदन के माध्यम से प्रतिदिन नमन किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मतिथि का यह पावन दिन क्षेत्र और राष्ट्र के लिए अनमोल है।
उन्होंने कहा कि धरती पर सर्दी, गर्मी और बरसात तीन ऋतुएं हैं। इनमें किसान के लिए वर्षा ऋतु अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में भाद्रपद माह चल रहा है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ, जबकि सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए शुक्ल पक्ष को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि चंद्रमा की चांदनी दोनों पक्षों में समान रहती है, अंतर केवल उसके बढ़ने और घटने का है।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि कौन-सा शब्द किस समय और किसके सामने बोलना है, इसका हमेशा ध्यान रखना चाहिए। जीवन में अध्यात्म के साथ औचित्य भी जरूरी है। जो जैसा है, उसके साथ वैसा व्यवहार करना ही औचित्य है। समवशरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां पद और व्यवस्था के अनुरूप सभी के बैठने का स्थान निर्धारित होता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि संसार के कल्याण के लिए जीना चाहिए। यही सच्चा परोपकार है। उन्होंने जीवन में बढ़ती सुविधाओं और विलासिता पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ विनाश का कारण बन रही है। ग्लेशियरों का पिघलना भी इसका परिणाम है। आवश्यकता की पूर्ति तक प्रकृति का उपयोग उचित है, लेकिन दिखावे और विलासिता के लिए उसका दोहन भविष्य में संकट पैदा कर सकता है। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने गीत प्रस्तुत किया।
ट्रस्ट अध्यक्ष राज लोढ़ा ने बताया कि 6 सितम्बर रविवार को साध्वी डॉ.विद्युतप्रभश्री जी की निश्रा में 108 जोड़ों के साथ उवसग्गहरं महापूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रातः 9 बजे प्रारम्भ होगा। इस अवसर पर कृष्णगिरी पीठाधीश्वर परमहंस परिवाजकाचार्य वसंत विजयानंद गिरी महाराज की उपस्थिति भी रहेगी। कार्यक्रम के संगीतकार नरेन्द्र वाणीगोता रहेंगे।
अपने लिए नहीं, संसार कल्याण के लिए जीना ही सच्चा परोपकारःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
