भक्ति, ध्यान एवं भजनों के त्रिवेणी माधुर्य से झरता रहा आत्म आनन्द का महाप्रपात
बांसवाड़ा, 04 सितम्बर/श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में श्री पीताम्बरा आश्रम में आयोजित बहुआयामी आध्यात्मिक उत्सव ने ज्ञान, ध्यान एवं भजन माधुर्य की धाराओं भरा प्रपात झराते हुए आनन्द और सुकून से नहला दिया।
आर्ट ऑफ लिविंग बांसवाड़ा चैप्टर के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य एवं दिव्य उत्सव में गुरुवार देर रात तक भक्ति, ध्यान एवं संगीत के इस अनूठे त्रिवेणी संगम में भक्ति लहरियों में डूबते-उतराते हुए शहर के साधकों एवं श्रद्धालुओं के समूह मंत्र मुग्ध हो उठे।
भक्ति और संगीत से सराबोर सांस्कृतिक संध्या-उत्सव की शुरुआत ज्ञान और ध्यान से हुई, जिसने उपस्थित सभी लोगों को आंतरिक शांति का अनुभव कराया। इसके बाद जैसे ही भजनों का दौर शुरू हुआ, पूरा आश्रम परिसर कृष्णमयी हो गया।
आर्ट ऑफ लिविंग बांसवाड़ा चैप्टर की जिला समन्वयक विनीता जोशी ने एक से बढ़कर एक सुरीले और भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए, जिनकी स्वर लहरियों पर सभी साधक परिवार सहित झूम उठे। भक्तों ने उत्साह के साथ झूमते हुए इसमें हिस्सा लिया।
गायत्री मण्डल द्वारा अभिनन्दन-इस अवसर पर गायत्री मण्डल बांसवाड़ा की ओर से आर्ट ऑफ लिविंग की जिला समन्वयक विनीता जोशी के साथ-साथ आर्ट ऑफ लिविंग टीचर सुभाष मेहता, दीपिका जोशी, मनीष माली, नरेश जोशी, कैलाश मूंदड़ा, जय प्रकाश शाह, हिमेश राठौर, रेखा मूंदड़ा, अरुणा मेहता और एंजल का अभिनन्दन किया गया। राजस्थान उपभोक्ता आयोग के निवर्तमान सदस्य शैलेन्द्र भट्ट का भी अभिनन्दन किया गया।
मण्डल की ओर से उपाध्यक्ष अनिमेष पुरोहित, कोषाध्यक्ष अनन्त जोशी, रचना व्यास, पुष्पा व्यास एवं आचार्य योगिता व्यास ने इन सभी को उपरणा पहनाकर अभिनन्दन किया।
आध्यात्मिक साहित्य भेंट-इस अवसर पर मण्डल की ओर से गायत्री मण्डल के आजीवन सदस्य आशीष अधिकारी एवं चन्द्रेश व्यास, कार्यकारिणी सदस्य अरुण व्यास, कर्मकाण्डी पं. राकेश शुक्ल, अनिल पण्ड्या, श्री पीताम्बरा आश्रम के कार्यक्रम समन्वयक मनोज नरहरि भट्ट,यामिनी भट्ट, अनिता वैष्णव, ललित आचार्य, हर्षित सोनी, अनिल एनएच भट्ट, राजश्री हाड़ा एवं विवेकराजसिंह ने उपस्थित गणमान्य नागरिकों एवं साधक-साधिकाओं को धार्मिक आध्यात्मिक साहित्य भेंट किया।
उत्सव का संचालन गायत्री मण्डल के आजीवन सदस्य शैलेन्द्र भट्ट ने किया जबकि आभार ज्ञापन मण्डल के कोषाध्यक्ष कथावाचक एवं आध्यात्मिक चिन्तक पं. अनन्त जोशी ने किया।
