उदयपुर, )। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में प्रन्यास प्रवर निरागरत्न मुनि की निश्रा में चरम तीर्थाधिपति, आसन्न उपकारी भगवान महावीर स्वामी के 2583वें केवलज्ञान कल्याणक एवं जैन शासन स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय शासन समर्पण महोत्सव का भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में समापन आयड़ तीर्थ में हुआ। समापन अवसर पर आयोजित शासन ध्वज वंदना कार्यक्रम में श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।
महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि महोत्सव के अंतिम दिन सोमवार को आयड़ जैन तीर्थ पर शासन ध्वज वंदना कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रन्यास प्रवर निरागरत्न मुनि के साथ सुमति चंद सागर महाराज की पावन निश्रा में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्म ध्वज के समक्ष श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक वंदना कर जिन शासन के प्रति अपनी आस्था और समर्पण प्रकट किया।
इस अवसर पर प्रन्यास प्रवर निरागरत्न महाराज ने कहा कि जिन शासन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर द्वारा स्थापित यह शासन मानव जीवन को संयम, त्याग, अहिंसा और सत्य के मार्ग पर अग्रसर करता है। वर्तमान युग में जब भौतिकता और स्वार्थ का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में जिन शासन के सिद्धांत ही मानवता को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।
तीन दिवसीय इस महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें अभिषेक, पूजा, प्रवचन, भक्ति संध्या एवं तपस्वियों का सम्मान प्रमुख रहे। महोत्सव के समापन अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने जिन शासन की मर्यादाओं का पालन करने और धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन में शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही, जिससे पूरा आयड़ तीर्थ परिसर धर्ममय वातावरण में सराबोर हो उठा। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर महासभा के पदाधिकारियों ने सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उपाध्यक्ष भोपाल सिंह परमार, कुलदीप नाहर, अंकुर मुर्डिया, राजेश जावरिया, राजेन्द्र जवेरिया, सतीश कच्छारा, प्रकाश नागौरी, राजेन्द्र कोठारी, चतर सिंह पामेचा, अशोक जैन, रमेश सिरोया, श्याम हरकावत, नरेन्द्र चौधरी, अभय नलवाया, कुलदीप मेहता, दिनेश भण्डारी सहित कई श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।
आयड़ जैन तीर्थ में गूंजा जिन शासन का जयघोष
