‘जिसे आत्मकल्याण की प्यास, वही संसार से निर्लिप्त’: साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में सोमवार को आयोजित नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को आत्मचिंतन, स्वदोष दर्शन और आत्मकल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद सभी जीवों के प्रति प्रेम और कल्याण की भावना रखी। उनका संदेश था कि प्रत्येक जीव अपनी आत्मदशा का स्वयं मालिक बने। हृदय में आत्मकल्याण की सच्ची प्यास जाग जाए तो व्यक्ति संसार में रहते हुए भी संसार से निर्लिप्त होकर आत्मचेतना को प्राप्त कर सकता है। साध्वीश्री ने कहा कि किसी वस्तु का मूल्य उसकी आवश्यकता और प्यास से तय होता…
