परमात्मा के समक्ष अक्षत पूजा से अक्षय पद की प्राप्ति होती :  साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री  

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

– आयड़ जैन तीर्थ में अनवरत बह रही धर्म ज्ञान की गंगा  
– साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की  

उदयपुर 17 अक्टूबर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में मंगलवार को विविध आयोजन हुए। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई। जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि विशेष महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा  ने अक्षत पूजा के महत्व में बताया कि सुन्दर थाल में उत्तम अक्षत रखकर प्रभु के सम्मुख खड़ा रहना। स्वस्तिक के चार कोने चारगति के सूचक है। जिसके ऊपर दर्शन- जान-चारिख रूप रत्नत्रयी के तीन ढेर किये जाते हैं। उनके ऊपर अर्धचन्द्राकार रूप सिद्धशिला की जाती है। उनके उपर रेखा है वह लोक का अंत भाग है। सिद्धशिला के उपर और रेखा के बीच में सिद्ध भगवंत विराजमान है। अक्षत पूजा करते समय इस प्रकार की भावना मानी चाहिये कि हे अक्षय पद पर विराजमान परमात्मा। चार गति सय इस संसार में चौराशी लाख जीनयोनि में मैं सभी स्थानों में अनन्त- अनन्त बार जन्म ले चुका हूँ। अब तो मैं जन्म-मरण के चक्करों से थका हूँ, अब तो मेरे पाँच थक गये है, अब किसी भी गति में मुझे कभी भी जन्म नहीं लेना है। इस थाली में रहे हुए अक्षत के दानों पर से छिलके निकल गये हैं। ये कण अब निर्मल और अजन्म बन चुके हैं। इन अक्षतों को जाने से वापिस नहीं लगते। इस असत की तरह मुझे भी सदा के लिए अजन्मा बनना है। अक्षय बनना है, अनन्त बनना है, अन्याबाध सुख पाना है। आप ऐसे स्थान पर विराजे हैं जहाँ से फिर इस संसार में जन्म नहीं लेना पड़ता है। हे नाथ! इस असत पूजा के प्रभाव से मुझे भी वहाँ आता है जहाँ आप बिराजते है। अक्षय पद की प्राप्ति हो, ऐसी अभिलाषा आपके चरण कमल में रखता हूँ।  चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर पर्युषण महापर्व के तहत प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!