– श्रावकों का तपस्या के क्रम में उन्नतीस दिन का तप जारी
उदयपुर ३१ जुलाई। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में सोमवार को विविध आयोजन हुए । महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में पद्मावती माता का जाप एवं सामूहिक एकासना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चौंतीस अतिशय का महा का अभिषेक एवं पूजन का आयोजन किया गया।
चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा की पावन निश्रा में भक्ति परमात्म का उत्सव के संदर्भ में चौंतीस अतिशय का महा का अभिषेक एवं पूजन का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि धाति कर्मों के क्षय के बाद तीर्थकर नाम कर्म उदय में आता है उस कर्म के उदय से जन्म से कर्म सम से ग्यारह और देवकृत उन्नीस अतिशय अर्थात् चौंतीस अतिशय सभी तीर्थकरों के एक समान होते हैं। तीर्थकर परमात्मा जैसा ऐश्वर्य अन्य किसी में नहीं होता है, जिन गुणों के द्वारा की तीर्थकर परमात्मा जगत् में रहे अन्य जीवों से बढक़र होते हैं, उन गुणों को अतिशय कहते हैं। अतिशय यानि कि जो वस्तु जगत् में श्री तीर्थकर को छोड़ अन्य किसी के पास नहीं होती है। परमात्मा ऐसे अतिशय से युक्त परमात्मा का बहुत ही भव्यतम रूप से परमात्म भक्ति का आयोजन हुआ। परमात्म भक्ति के द्वारा ही साधक अर्थ अपनी सिद्धि प्राप्त करता है। अभिषेक करते – करते हो जीवात्मा स्वयं को निर्मल बना लेता है। श्रावक-श्राविकाओं के द्वारा भक्त गणों के द्वारा विधान किया गया। जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।
आयड़ तीर्थ में 34 अतिशय युक्त महाअभिषेक एवं पूजन किया
