उदयपुर। राज्य सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीयन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिक हितैषी बनाने के लिए विभिन्न डिजिटल सुविधाएं शुरू की हैं। विभागीय पोर्टल ‘पहचान’ के माध्यम से जन्म, मृत्यु एवं विवाह घटनाओं का ऑनलाइन पंजीयन किया जा रहा है, जिससे आमजन को घर बैठे ही कई सेवाओं का लाभ मिल रहा है। आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के संयुक्त निदेशक पुनीत शर्मा ने बताया कि पहचान पोर्टल और पहचान एप के माध्यम से जारी ई-साइन एवं डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र पूर्णतः मान्य दस्तावेज हैं। इनका सत्यापन क्यूआर कोड एवं पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के तहत नवजात शिशु का पंजीकरण बिना नाम के भी कराया जा सकता है तथा जन्म पंजीकरण की तिथि से एक वर्ष के भीतर निशुल्क ऑनलाइन नाम जोड़ने की सुविधा उपलब्ध है। आमजन की सुविधा के लिए अब जन्म, मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र व्हाट्सएप के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही विभागीय व्हाट्सएप चैटबॉट के जरिए पंजीयन, आवेदन की स्थिति, रजिस्ट्रार एवं उप-पंजीयक से संबंधित जानकारियां भी प्राप्त की जा सकती हैं।शर्मा ने बताया कि जन्म रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन के लिए राजस्थान ई-आर्काइवल मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से राजपत्र अधिसूचना जारी होने के बाद रिकॉर्ड में संशोधन किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त गोद लिए गए बच्चों के जन्म पंजीकरण, गुमशुदा व्यक्तियों की मृत्यु के पंजीकरण तथा आधार लिंकिंग संबंधी प्रक्रियाओं को भी स्पष्ट एवं सरल बनाया गया है। राजस्थान जन आधार प्राधिकरण द्वारा नवजात शिशुओं का स्वतः जनआधार नामांकन तथा मृत्यु होने पर संबंधित सदस्य का नाम जनआधार परिवार से स्वतः हटाने की व्यवस्था भी लागू की गई है। इसके लिए जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाते समय आवश्यक आधार एवं जन आधार विवरण दर्ज करना होगा।
पहचान पोर्टल से जन्म-मृत्यु पंजीयन हुआ और आसान
