अधिक मास के द्वितीय सोमवार आशुतोष भगवान रजत पालकी में सवार में ओगडी माई धुणी (शक्ति पीठ) हुई भव्य आरती

विशेष झूले में हुए विराजमान  
उदयपुर। सार्वजनिक प्रन्यास मंदिर श्री महाकालेश्वर के अध्यक्ष तेजसिंह सरूपरिया ने बताया कि श्रावण मास व अधिक मास के द्वितीय सोमवार पर श्रावण महोत्सव के तहत् आशुतोष भगवान श्री महाकालेश्वर के प्रतिकात्मक स्वरूप को रजत पालकी में सवार कर मंदिर पथ की परिक्रमा करा (ओगडी माई) शक्ति पीठ स्थित सभागार पहुंचे। पालकी के साथ शिवभक्त व महिलाओं द्वारा महाकाल के जयघोष, नृत्य व भजन गाते लगाते चले।
प्रन्यास सचिव चन्द्रशेखर दाधीच ने बताया कि आशुतोष भगवान श्री महाकालेश्वर की रजत पालकी  ओगडी माई शक्ति पीठ पर विराजित कर भव्य आरती की गई। उन्होंने अधिक मास के बारे में बताया कि अधिक मास एक विशेष अवधि है जो धार्मिक दृष्टि के साथ धार्मिक गतिविधियों के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार समय गणना के उचित क्रम के लिए लीप वर्ष का उपयोग किया जाता है, उसी तरह हिंदू धर्म ग्रंथों ने पंचांग गणना के लिए अधिक मास की अवधारणा को अपनाया है। हर तीसरे वर्ष में आने वाले इस समय को अधिक मास के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि अधिक मास में संक्रांति न होने के कारण इसे मलमास कहा जाता है।


दाधीच ने बताया कि अधिक मास को कई नामों से पुकारा जाता है। यह जिस भी माह में आता है उसे उसी माह के नाम से संबोधित किया जाता है, इसके अलावा इसे पुरूषोत्तम या मल मास, संसर्प, मलिम्लुच, अधिमास, अनाहस्पति मास के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि अधिक मास में किए गए जप, तप और दान का भी विशेष महत्व है। सूर्य की बारह संक्रांतियों के आधार पर हमारे चंद्रमा पर आधारित बारह मास कहे गए हैं और अधिक मास या मल मास हर तीन साल के अंतराल पर आता है. इस माह में मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं, लेकिन धार्मिक कार्य फलदायी होते हैं. समय के अंतर की असमानता को दूर करने के लिए अधिक मास और क्षय मास का नियम बनाया गया है.
श्रावण महोत्सव समिति अध्यक्ष सुनील भट्ट व संयोजक रमाकान्त अजारिया ने बताया कि श्रावण महोत्सव व रजत वर्ष महोत्सव की तैयारियां जोरों से चल रही है आदी योगी की 51 फीट की मूर्ति शीघ्र ही शिवभक्तों के दर्शनार्थ तैयार हो जाएगी। 8 अगस्त को संपूर्ण मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा, फुव्वारों, सुन्दर डेकोरशन से सुसज्जित किया जाएगा। भट्ट ने बताया कि 8 अगस्त को भक्तों के लिए आशुतोष भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष श्रृंगार धरा 56 भोग का प्रसाद धराया जाएगा व सांय काल 108 दीपकों की आरती की जाएगी।


महोत्सव समिति के विनोद कुमार शर्मा व एडवोकेट महिपाल शर्मा ने बताया ने बताया कि आगामी 28 अगस्त को निकलने वाली शाही सवारी की तैयारिया पूर जोर से चल रही है। इन्होंने बताया कि भोलेनाथ की गुफा से निकलने वाली शाही सवारी के लिए भेालेनाथ जी की गुफा के नन्दी द्वारा व सिंह द्वारा का रंगरोगन  करा उन्हें आकर्षक बनाया जा रहा है। इन्होंने बताया कि शाही सवारी में परम्परागत गवरी, विशाल नंदी पर सवार महाकाल व सिंह की सवारी पर विराजित जगदम्बा विशेष झांकी रहेगी।
महोत्सव समिति की महिला संयोजिका श्रीमती दीक्षा भार्गव, दुर्गा टांक, प्रेमलता लोहार ने बताया ने बताया कि इस बार शाही सवारी में बडी संख्या में महिलाएं मंगल कलश धारण कर पूरी सवारी में महाकाल के भजन गाते चलेगी। साथ ही 11 महिलाओं का जत्था सवारी के आगे झाडु बुहारते चलेगी।
श्रावण महोत्सव समिति के गोपाल लोहार ने बताया कि शाही सवारी को भव्य रूप देने के लिए विभिन्न प्रकार की समितियों का गठन कर उन्हें कार्यभार सौंप दिया है ताकि सवारी में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आए। पूरी सवारी परम्परागत रूप से निकलने इसके लिए अलग अलग समिति को उनका दायित्व सौंप दिया गया। आज की बैठक में के.जी.पालीवाल, रमेश राजपूत, शंकर कुमावत, विनोद कुमार शर्मा, एडवोकेट महिपाल शर्मा राजेश सोनी, गिरिराज सोनी, ओम सोनी, पुरूषोत्तम जीनगर, कमल चैहान, प्रतीक्षा मेहता, आरती जोशी, यतेन्द्र दाधीच, चतुर्भुज आमेटा, भंवरलालपालीवाल आदि उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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