—संत की अग्नि तपस्या देखने के लिए उमड़े श्रद्धालु
उदयपुर। जिले के भींडर क्षेत्र में इस झुलसाती गर्मी में आस्था और तप की अद्भुत मिसाल देखने को मिली। डेरावड़ स्थित श्री रूपनाथ जी मठ में साधु महंत योगी प्रेमनाथ महाराज ने 21 दिनों तक तपती दोपहर में अग्नि तपस्या कर सभी को चौंका दिया। चारों तरफ धधकती धूणियों और ऊपर से प्रचंड धूप के बीच उनकी साधना ने श्रद्धालुओं को न केवल आकर्षित किया, बल्कि आस्था और संयम की अनूठी तस्वीर भी पेश की। दरअसल, डेरावड मठ पर 3 अप्रैल से शुरू निरंतर 21 दिनों तक यह तपस्या चली। योगी प्रेमनाथ महाराज ने रोजाना दोपहर 12 से 2 बजे तक जब सूर्य की तपिश चरम पर होती है, चारों ओर 9 धधकती अग्नियों (धुणी) के बीच बैठकर गहन योग और तपस्या की। इस दौरान चिलचलाती धूप के बीच तापमान कभी 38 तो कभी 39 डिग्री सेंटीग्रेड रहा।
जनकल्याण और विश्व शांति की भावना के साथ की गई तपस्या
डेरावड मठ में आयोजित 21 दिवसीय नव धूणी अग्नि तपस्या का गुरुवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य समापन हुआ। यह तपस्या महंत योगी प्रेमनाथ महाराज के सान्निध्य में जनकल्याण और विश्व शांति की भावना के साथ आयोजित की गई। मां हिंगलाज माता की विधिवत आरती और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रेरणा का केंद्र बना अद्भुत दृश्य
गुरुदेव के नव धूणी स्थल पर आगमन के बाद धूणियों की पूजा, आरती और हवन संपन्न हुआ। इसके बाद गुरुदेव ने भभूति धारण कर तपस्या का आसन ग्रहण किया। दोपहर की प्रचंड धूप में जब तापमान अपने चरम पर था, तब गुरुदेव नौ प्रज्ज्वलित अग्नियों के बीच करीब 3 घंटे तक गहन साधना में लीन रहे। यह अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रेरणा का केंद्र बन गया।
कार्यक्रम में गोगुन्दा से दौलत गिरि महाराज, धूणी माता कुंडाल से डालू दास महाराज, राजसमंद से पागल नाथ महाराज शामिल हुए और मुख्य अतिथि देवेन्द्र सिंह शक्तावत (भींडर) मौजूद रहे। मठ कार्यकारिणी सदस्य दशरथ वसीटा ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं।
धधकती धूणियों के बीच 21 दिन तक तप
