उदयपुर। दिनांक 26 से 28 अक्टूबर को विद्या भवन गोविंदराम सेकसरिया शिक्षक महाविद्यालय में तीन दिवसीय “शिक्षक शिक्षा में कला एवं संस्कृति का समेकन” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमे भावी शिक्षकों में कला एवं संस्कृति की समझ एवं रुचि जागृत कर अभ्यास का अवसर प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि वे विद्यालय मे शिक्षण एव विद्यालय गतिविधियों के आयोजन में इन कलाओ का समावेश कर सके।
कार्यशाला में मूकाभिनय, नाटक, क्राफ्ट, नृत्य एवं संगीत कलाओ के राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों डॉ बसन्त कश्यप, डॉ विलास जानवे, डॉ प्रेम भंडारी, श्रीमती प्रवीणा जैन, निलोफर मुनीर डॉ लईक हुसैन एव शिप्रा चटर्जी द्वारा विद्यार्थियों से अभ्यास करवाया जा रहा है। कार्यशाला में बी एड के विद्यार्थियों एव संकाय सदस्यों सहित 200 संभागियों ने भाग लिया। दिनांक 26/07/23 को कार्यशाला का उद्घाटन सत्र हुआ जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमान अजय मेहता अध्यक्ष विद्या भवन सोसायटी रहे उन्हें अपने व्याख्यान में कहा कि आज के माहौल में मानवीय मूल्यों के संवर्धन में कला एवं एक दूसरे की संस्कृति को गहराई से समझने की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता प्रो एम पी शर्मा ने बताया कि कला का उद्देश्य अच्छा इंसान बनाना, उनमे सौंदर्य बोध एवम मूल्यों का विकास करना है, जो कि शिक्षा के बालक के सर्वांगीण विकास करने को सपोर्ट करता है। कार्यशाला की थीम महाविद्यालय प्राचार्य डॉ फरजाना इरफान ने प्रस्तुत किया।प्राचार्य द्वारा बताया गया कि कला और संस्कृतिक का शिक्षा से कैसे संबंध है।इस के माध्यम से हम शिक्षा को आनंददायी बना सकते हैं। मंच संचालन कार्यशाला समन्वयक डॉ मालचंद ने किया एवं धन्यवाद डॉ अख्तर बानो ने दिया।
तीन दिवसीय “शिक्षक शिक्षा में कला एवं संस्कृति का समेकन” विषय पर कार्यशाला का आयोजन
